39.27 लाख की सड़क पहली ही बरसात में हुई क्षतिग्रस्त, कई स्थानों पर उखड़ी ऊपरी परत एवं बने गड्ढे
शाहगंज, जौनपुर। सेंट थॉमस मार्ग पर करीब एक किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण पिछले वर्ष करीब 39.27 लाख रुपये की लागत से कराया गया था। निर्माण के बाद लोगों को बेहतर आवागमन की उम्मीद थी लेकिन पहली बरसात के बाद सड़क के कुछ हिस्सों में क्षति दिखाई देने लगी है। कई स्थानों पर ऊपरी परत उखड़ गई है और गड्ढे बन गए हैं। बारिश के दौरान इनमें पानी भरने से राहगीरों को आवागमन में परेशानी हो रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक सड़क का निर्माण लंबे समय से चली आ रही समस्या के समाधान की उम्मीद में कराया गया था। निर्माण पूरा होने के बाद कुछ समय तक आवागमन सुगम रहा लेकिन बारिश के बाद सड़क के कुछ हिस्सों में आई क्षति से लोगों की परेशानी फिर बढ़ गई है।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार सड़क के आरसीसी हिस्से को छोड़कर कुछ स्थानों पर ऊपरी सतह क्षतिग्रस्त हुई है। कहीं सड़क की परत उखड़ी हुई दिखाई दे रही है तो कहीं छोटे-बड़े गड्ढे बने हैं। बारिश के दौरान गड्ढों में पानी भर जाने से राहगीरों को सड़क की स्थिति का सही अंदाजा नहीं लग पाता। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की जल्द मरम्मत के साथ ही क्षति के कारणों की भी जानकारी सामने आनी चाहिए, ताकि समस्या का स्थायी समाधान हो सके।
सेंट थॉमस मार्ग पर कई अन्य विद्यालय होने के कारण इस मार्ग से प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं गुजरते हैं। सड़क पर गड्ढे और जलभराव होने से बच्चों को आने-जाने में कठिनाई हो रही है। अभिभावकों का कहना है कि बारिश के दौरान बच्चों को पानी और कीचड़ से बचाकर विद्यालय तक पहुंचाना पड़ता है। उनका कहना है कि सड़क की मरम्मत जल्द होने से आवागमन में सुविधा होगी।
आरटीआई कार्यकर्ता ओपी सिंह के अनुसार सड़क का निर्माण पिछले वर्ष पूरा हुआ था और करीब एक किलोमीटर लंबे मार्ग के लिए 39.27 लाख रुपये की लागत स्वीकृत हुई थी। उन्होंने सड़क के मौजूदा हालात को देखते हुए इसके क्षतिग्रस्त होने के कारणों की जांच कराने की मांग किया है। उनका कहना है कि तकनीकी जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि सड़क किन कारणों से क्षतिग्रस्त हुई और मरम्मत के लिए किस प्रकार की कार्रवाई आवश्यक है। लोगों का कहना है कि सड़क की मरम्मत जरूरी है लेकिन इसके साथ यह भी देखा जाना चाहिए कि सड़क के क्षतिग्रस्त होने का कारण क्या है। इसके लिए संबंधित विभाग द्वारा मौके का निरीक्षण और तकनीकी परीक्षण कराया जा सकता है।
यदि जांच में निर्माण या अन्य किसी तकनीकी कारण की पुष्टि होती है तो उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल लोगों की मांग है कि सड़क की स्थिति का जल्द निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत कराई जाए, ताकि बारिश के दौरान राहगीरों और स्कूली बच्चों को परेशानी न हो। अब नजर संबंधित विभाग की कार्रवाई पर है कि सड़क की क्षति का निरीक्षण कब किया जाता है और मरम्मत के साथ इसके कारणों की स्थिति किस तरह स्पष्ट की जाती है।

