सेवा सुरक्षा और सम्मानजनक मानदेय की मांग, स्ववित्तपोषित शिक्षकों ने कैशलेस चिकित्सा योजना के सांकेतिक बहिष्कार का किया ऐलान
जौनपुर। प्रदेश के 331 अनुदानित महाविद्यालयों में करीब 25 वर्षों से संचालित स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में कार्यरत लगभग 3000 असिस्टेंट प्रोफेसर सेवा सुरक्षा, सम्मानजनक मानदेय और सेवा विनियमन की मांग को लेकर मुखर हो गए हैं। इसी क्रम में अशासकीय अनुदानित महाविद्यालय/विश्वविद्यालय स्ववित्तपोषित शिक्षक संघ, जौनपुर के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर अपनी मांगों से अवगत कराया।
संघ का कहना है कि वर्ष 2000 में शुरू हुई स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों की दोहरी व्यवस्था में कार्यरत शिक्षक पिछले करीब 25 वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं। पिछले नौ वर्षों से शिक्षक लगातार अपनी सेवाओं के विनियमितीकरण अथवा यूजीसी वेतनमान के साथ सेवा सुरक्षा की मांग कर रहे हैं, लेकिन अपेक्षित निर्णय नहीं होने से शिक्षकों में असंतोष है।
शिक्षकों ने कहा कि वे मुख्यमंत्री की शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना के उद्देश्य के विरोधी नहीं हैं। योजना का सांकेतिक बहिष्कार उनकी मूल सेवा समस्याओं के समाधान की मांग को प्रभावी ढंग से सरकार तक पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। संघ के अनुसार पिछले चार वर्षों में शासन और जनप्रतिनिधियों को हजारों पत्र भेजे जा चुके हैं। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, विधान परिषद, विधानसभा, विनियमन समिति एवं याचिका समिति समेत विभिन्न स्तरों पर समस्याएं उठाई गई हैं। संघ के प्रतिनिधियों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारियों तथा मुख्यमंत्री से भी व्यक्तिगत रूप से मिलकर समस्याओं के समाधान का अनुरोध किया है।
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि अनेक शिक्षक 45 से 60 वर्ष की आयु पार कर चुके हैं। वर्षों तक शिक्षण कार्य करने के बावजूद उन्हें बेहद कम मानदेय पर सेवाएं देनी पड़ रही हैं। उनका कहना है कि यह व्यवस्था हजारों शिक्षक परिवारों के साथ-साथ लाखों विद्यार्थियों को भी प्रभावित कर रही है।
संघ ने कहा कि स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ रोजगार और सेवा सुरक्षा भी शिक्षक के सम्मानजनक जीवन का महत्वपूर्ण आधार है। ज्ञापन कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों ने “शिक्षक एकता जिंदाबाद” के नारे लगाए।
कार्यक्रम में अध्यक्ष डॉ. सुशील कुमार मिश्रा, महामंत्री डॉ. संतोष कुमार पांडेय, डॉ. ओम प्रकाश दुबे, डॉ. मृत्युंजय मिश्रा, डॉ. त्रिपुरारी उपाध्याय, डॉ. मधु पाठक, रागिनी राय, डॉ. गुंजन मिश्रा, डॉ. संतोष तिवारी, डॉ. सुधाकर शुक्ला, डॉ. धर्म साहू, डॉ. महेंद्र प्रताप सिंह, डॉ. प्रवीण कुमार सिंह, डॉ. पवन सिंह, डॉ. उमेश सिंह, डॉ. कुलदीप श्रीवास्तव, अमित कुमार साहू, डॉ. विक्रम सिंह, अपर्णा सिंह, डॉ. क्षमता राय, डॉ. प्रियंका सिंह, डॉ. पूजा सिंह, डॉ. नेहा सिंह, डॉ. दीपशिखा सिंह, डॉ. सुषमा मिश्रा, डॉ. अनीश वर्मा, डॉ. अरविंद गुप्ता, डॉ. अर्चना सिंह सहित अन्य शिक्षक मौजूद रहे।

