“भाजपा समर्थक इलाके में विकास की खुली पोल! 72 घंटे से बिजली गुल, गड्ढों में तब्दील सड़क पर हिचकोले खा रही जनता”
स्थानीय लोगों के अनुसार कॉलोनी की सड़क लंबे समय से जर्जर हालत में है। जगह-जगह सड़क टूट चुकी है और बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। इससे पैदल राहगीरों के साथ ही दोपहिया वाहन चालकों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। लोगों का कहना है कि सड़क की बदहाली के कारण हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। बारिश होने पर स्थिति और विकट हो जाती है। गड्ढों में पानी भर जाने के बाद सड़क और गड्ढे में फर्क करना मुश्किल हो जाता है और लोग गिरकर चोटिल होते रहते हैं।
72 घंटे से बिजली गुल होने का दावा
सड़क की बदहाली के साथ ही कॉलोनी में बिजली संकट ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। स्थानीय निवासी उर्वशी सिंह, जो समाजसेवी संगठनों में सक्रिय हैं और भाजपा समर्थक भी हैं, ने दावा किया कि उनके इलाके में करीब 72 घंटे से बिजली आपूर्ति बाधित है। उन्होंने बताया कि बिजली नहीं होने से घरों में रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं। यहां तक कि मोबाइल फोन चार्ज करना भी मुश्किल हो गया है। लोग आसपास की वैकल्पिक व्यवस्था से किसी तरह मोबाइल चार्ज करने को मजबूर हैं।
उर्वशी सिंह के मुताबिक बिजली समस्या को लेकर संबंधित विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों से कई बार शिकायत की गई, लेकिन अब तक लोगों को केवल आश्वासन ही मिला है। उनका आरोप है कि अब कुछ विभागीय अधिकारी फोन तक उठाने से कतरा रहे हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों को यह जानकारी तक नहीं मिल पा रही है कि बिजली आपूर्ति आखिर कब तक बहाल होगी।
सड़क मरम्मत के नाम पर भी सिर्फ आश्वासन
स्थानीय लोगों का कहना है कि चांदपुर महावीर कॉलोनी नगर पालिका क्षेत्र में आती है। इसके बावजूद लंबे समय से सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई। लोगों ने नगर पालिका प्रशासन से सड़क का स्थलीय निरीक्षण कराकर उसकी स्थिति का आकलन कराने और आवश्यकता के अनुसार इंटरलॉकिंग कराने की मांग की है, ताकि आवागमन सुचारु हो सके और दुर्घटनाओं का खतरा कम किया जा सके।
भाजपा समर्थक इलाके में बदहाली पर विपक्ष का तंज
इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि भाजपा समर्थक माने जाने वाले इलाके में ही सड़क और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं का यह हाल है तो जिले के अन्य इलाकों में विकास कार्यों की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। हालांकि इन राजनीतिक आरोपों पर अभी नगर पालिका प्रशासन और बिजली विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क और बिजली कोई विलासिता नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी की बुनियादी जरूरतें हैं। एक तरफ लोग जर्जर सड़क पर दुर्घटना के खतरे के बीच आवागमन करने को मजबूर हैं तो दूसरी तरफ लंबे समय से बिजली आपूर्ति बाधित होने से घरेलू जीवन प्रभावित हो रहा है। लोगों ने प्रशासन से तत्काल बिजली आपूर्ति बहाल कराने, सड़क का स्थलीय निरीक्षण कराने और मरम्मत कराकर समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की है।
सवाल यह है कि जब शहर से सटे इलाके में ही लोगों को सड़क और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए शिकायतों का सहारा लेना पड़ रहा है, तो जिम्मेदार विभाग आखिर कब जागेंगे?

