83 वर्षों की परंपरा को आगे बढ़ाएंगे हुसेनाबाद के रामभक्त, 15 अक्टूबर से शुरू होगी रामलीला की भव्य मंचीय प्रस्तुति
स्थानीय कलाकारों के अभिनय में जीवंत होंगे प्रभु श्रीराम के आदर्श, 21 अक्टूबर तक रामभक्ति से सराबोर रहेगा हुसेनाबाद
जौनपुर। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जीवन चरित्र, त्याग, तपस्या और धर्म की विजय की गाथा एक बार फिर हुसेनाबाद की धरती पर जीवंत होने जा रही है। जौनपुर के हुसैनाबाद में श्रीराम लीला समिति की ओर से 15 अक्टूबर से रामलीला का मंचन शुरू होगा, जो 21 अक्टूबर तक चलेगा। खास बात यह है कि 83 वर्षों से चली आ रही इस धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा को स्थानीय कलाकार अपने अभिनय के माध्यम से आगे बढ़ाएंगे। सात दिनों तक रामलीला के विभिन्न प्रसंगों का मंचन कर कलाकार श्रद्धालुओं को रामकथा से जोड़ेंगे। आयोजन को लेकर रामभक्तों में उत्साह का माहौल है।
हुसैनाबाद की रामलीला की विशेष पहचान इसकी वर्षों पुरानी परंपरा और स्थानीय कलाकारों की सहभागिता है। यहां कलाकार केवल पात्रों की भूमिका नहीं निभाते, बल्कि अपनी आस्था, समर्पण और भावपूर्ण अभिनय से रामायण के प्रसंगों को जीवंत करने का प्रयास करते हैं। मंच पर भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, भरत, हनुमान और रावण जैसे पात्रों के माध्यम से रामकथा के विविध रूप दर्शकों के सामने प्रस्तुत किए जाएंगे।
रामलीला भारतीय लोकसंस्कृति की ऐसी परंपरा है, जिसमें धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक और नैतिक मूल्यों का भी संदेश मिलता है। स्थानीय कलाकारों द्वारा इसका मंचन किए जाने से नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिलता है। साथ ही, क्षेत्र की प्रतिभाओं को अपनी कला प्रदर्शित करने का मंच भी प्राप्त होता है।
वर्ष 1943 में स्थापित श्रीराम लीला समिति, हुसैनाबाद की यह परंपरा समय के साथ पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती रही है। आठ दशक से अधिक समय से आयोजित हो रही रामलीला क्षेत्र की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बन चुकी है। बदलते दौर में भी इस परंपरा का कायम रहना इस बात का प्रमाण है कि रामकथा आज भी जनमानस के हृदय में विशेष स्थान रखती है।
रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों को समाज तक पहुंचाया जाता है। पिता के वचन की रक्षा के लिए वनवास स्वीकार करना, भाई के प्रति प्रेम, मित्रता का सम्मान, अन्याय के विरुद्ध संघर्ष और सत्य के मार्ग पर अडिग रहना प्रभु श्रीराम के जीवन के ऐसे प्रसंग हैं, जो हर युग में मानवता को दिशा देते हैं।
रामलीला का महत्व केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है। यह समाज को मर्यादा, त्याग, सेवा, सद्भाव और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश भी देती है। भगवान श्रीराम का चरित्र सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। वहीं, हनुमान जी की भक्ति समर्पण की प्रेरणा देती है और भरत का चरित्र निस्वार्थ प्रेम एवं त्याग का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करता है।
हुसैनाबाद में सात दिनों तक चलने वाली रामलीला के माध्यम से एक बार फिर श्रद्धालुओं को इन आदर्शों को करीब से जानने और समझने का अवसर मिलेगा। स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियों के बीच रामभक्ति का वातावरण बनेगा और रामायण के प्रसंग लोगों के मन में धर्म तथा सदाचार के प्रति आस्था को मजबूत करेंगे।
श्रीराम लीला समिति, हुसैनाबाद के तत्वावधान में रामलीला का आयोजन रामलीला मैदान, टी.डी. कॉलेज रोड, हुसैनाबाद, जौनपुर में किया जाएगा। समिति की ओर से श्रद्धालुओं और नगरवासियों से कार्यक्रम में शामिल होकर इस ऐतिहासिक धार्मिक परंपरा का हिस्सा बनने की अपील की गई है।
83 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को रामायण के आदर्शों से जोड़ने वाला सांस्कृतिक सेतु है। जब स्थानीय कलाकार मंच पर प्रभु श्रीराम की लीलाओं को साकार करेंगे, तब हुसैनाबाद की फिजा रामनाम और भक्ति के भाव से सराबोर होगी।

