गांधी-शास्त्री जयंती पर जिले में गूंजा सत्य, अहिंसा और स्वच्छता का संदेश
न्यायालय में गांधी प्रतिमा का अनावरण, मध्यस्थता पर संगोष्ठी; जेल में खेलकूद व सांस्कृतिक कार्यक्रम, विद्यालयों में स्वच्छता अभियान
जौनपुर। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर गुरुवार को जिले में विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए। जनपद न्यायालय परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। वहीं गांधीवादी दृष्टिकोण और मध्यस्थता को लेकर विधिक संगोष्ठी आयोजित हुई। जिला कारागार में बंदियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने के साथ विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग किया। टीडी कॉलेज में भी गांधी-शास्त्री के विचारों को आत्मसात करने और स्वच्छता का संदेश दिया गया।
न्यायालय परिसर में हुआ गांधी प्रतिमा का अनावरण
जनपद न्यायालय परिसर में जनपद न्यायाधीश सुशील कुमार शशि ने महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण किया। प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद गांधी और लालबहादुर शास्त्री के चित्रों पर श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। इस दौरान रामधुन और भजन का सामूहिक गायन हुआ।
उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर पाक्सो अधिनियम के प्रति जागरूकता तथा राष्ट्र के नाम मध्यस्थता अभियान-3.0 के प्रचार-प्रसार के लिए प्रभात फेरी निकाली गई। जनपद न्यायाधीश ने हरी झंडी दिखाकर प्रभात फेरी को रवाना किया। इसमें नेहरू बालोद्यान सीनियर सेकेंडरी स्कूल के विद्यार्थियों ने भाग लिया।
इसके बाद ‘गांधीवादी दृष्टिकोण एवं मध्यस्थता : विवाद से संवाद तक’ विषय पर विधिक संगोष्ठी हुई। इसमें वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, टीडी लॉ कालेज और उमानाथ सिंह लॉ कालेज के विधि छात्रों ने प्रतिभाग किया।
दीवानी न्यायालय अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष अवधेश सिंह ने कहा कि अधिवक्ता केवल विधि व्यवसायी ही नहीं, बल्कि समाज का प्रहरी भी है। वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने भारतीय परंपरा में मध्यस्थता के विभिन्न उदाहरणों पर प्रकाश डाला। जनपद न्यायाधीश ने कहा कि मध्यस्थता न्यायालयों में लंबित मामलों के निस्तारण का प्रभावी माध्यम है। इससे पक्षकारों को सस्ता, सुलभ और शीघ्र न्याय मिलने के साथ आपसी संबंध भी बने रहते हैं।
इस अवसर पर चार दशक से अधिक पुराने मामलों को मध्यस्थता के माध्यम से निस्तारित कराने वाले न्यायिक अधिकारी, वरिष्ठ अधिवक्ताओं और मध्यस्थ को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। संबंधित पक्षकारों को गांधीजी का चित्र भेंट किया गया।
जिला कारागार में खेलकूद और सांस्कृतिक कार्यक्रम
जिला कारागार में गांधी-शास्त्री जयंती पर विशेष कार्यक्रम आयोजित हुआ। कारागार के मुख्य द्वार पर राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ का गायन किया गया। इसके बाद जेल अधीक्षक पवन कुमार त्रिवेदी ने ध्वजारोहण किया। गांधी और शास्त्री के चित्रों पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के बाद गांधीजी के प्रिय भजन ‘रघुपति राघव राजा राम’ का सामूहिक गायन किया गया।
बंदियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। साथ ही शतरंज, कैरम, खो-खो, वालीबाल, जलेबी कूद समेत विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं आयोजित हुईं। महिला बंदियों के बीच मेहंदी और रंगोली प्रतियोगिता कराई गई। जेल अधीक्षक ने नशा उन्मूलन पर गोष्ठी कर बंदियों को गांधी और शास्त्री के आदर्शों पर चलने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में बंदियों को फल वितरित किए गए।
टीडी कॉलेज में सफाई कर दिया स्वच्छता का संदेश
विद्यालय में भी गांधी और शास्त्री जयंती श्रद्धा के साथ मनाई गई। प्रधानाचार्य डॉ. सत्य प्रकाश सिंह समेत विद्यालय के पूरे स्टाफ ने दोनों महापुरुषों के चित्रों पर माल्यार्पण कर पुष्प अर्पित किए। प्रधानाचार्य, शिक्षकों और एनसीसी कैडेटों ने विद्यालय परिसर में साफ-सफाई कर स्वच्छता का संदेश दिया।
आयोजित सभा में प्रधानाचार्य डॉ. सत्य प्रकाश सिंह ने कहा कि गांधीजी के सत्य के मार्ग पर चलने के संदेश को जीवन में अपनाना चाहिए। रविंद्र सिंह, जय सिंह, अमरेश राय और विद्यार्थियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में राजेश सिंह, कपिल देव सिंह, रमेश चंद्र सिंह, अंबर सिंह, सत्य प्रकाश सिंह, दिनेश सिंह, प्रदीप कुमार सिंह, आशीष सिंह, राकेश कुमार, कमलेश यादव, अभिषेक सिंह, राजीव सिंह और श्याम नारायण मौर्य समेत शिक्षक, कर्मचारी व विद्यार्थी उपस्थित रहे।
इस तरह जिले में गांधी-शास्त्री जयंती पर न्यायालय से लेकर कारागार और विद्यालयों तक सत्य, अहिंसा, संवाद, स्वच्छता और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश दिया गया।


