बिना किसी सहारे के सब कुछ कर रहा है 100 फीसदी अंधा
https://www.shirazehind.com/2014/01/100.html
अंधे होने का प्रमाण पत्र बनवाने से विभाग पर उठी अंगुली
जौनपुर। 100 फीसदी अंधे व्यक्ति का बिना किसी सहारे के चलना, लिखना, पढ़ना, साइकिल चलाना एकदम आश्चर्य की बात है लेकिन ऐसा ही एक व्यक्ति है जो सब कुछ करता है। इतना ही नहीं, वह सौ फीसदी अंधे होने का प्रमाण पत्र भी बनवाया हुआ है जो स्वास्थ्य विभाग की जांच एवं कार्यों पर सवालिया निशान उठा रहा है। अमर शहीद उमानाथ सिंह जिला चिकित्सालय में जांच के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय द्वारा प्रमाणित कर दिया गया कि वह 100 फीसदी अंधा है जिसको पूर्ण अंधे होने का प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया गया है। बता दें कि यह अंधा व्यक्ति ज्ञानदत्त शुक्ल पुत्र लाल शंकर शुक्ल निवासी हरबसपुर थाना लाइन बाजार है जिसने सरकार की आंख में धूल छोंक कर शासन द्वारा दी जाने वाली सभी सुविधाओं का लाभ पूर्ण रूप से उठा रहा है जबकि वास्तविकता कुछ और है जो ज्ञानदत्त के कार्यों से बखूबी उजागर हो रहा है। उसे देखने वालों की मानें तो प्रातः वह साइकिल चलाकर बाजार करता है तथा समाचार पत्र पढ़ने के साथ अन्य मोटे-महीन कामों को बखूबी ढंग से करता है। यहां तक कि न्यायालय में चिपकायी गयी सूची पढ़कर वह अपने तारीख को देखता है तथा यहां अकेले साइकिल या किसी अन्य सवारी से आता है और केश की पैरवी करने के साथ ही अन्य कार्य को किसी सामान्य व्यक्ति की तरह ही करता है। सवाल यहां यह उठता है कि उक्त व्यक्ति की मेडिकल जांच किस प्रकार करके पूर्णरूपेण अंधा होने का प्रमाण पत्र दे दिया गया? विभागीय सूत्रों की मानें तो उक्त व्यक्ति का रजिस्टेªशन नम्बर 63418 है जो 17 अगस्त 2009 को जांचोपरांत जनपद के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किया गया है तथा उसके प्रमाण पत्र की संख्या 7 है।
जौनपुर। 100 फीसदी अंधे व्यक्ति का बिना किसी सहारे के चलना, लिखना, पढ़ना, साइकिल चलाना एकदम आश्चर्य की बात है लेकिन ऐसा ही एक व्यक्ति है जो सब कुछ करता है। इतना ही नहीं, वह सौ फीसदी अंधे होने का प्रमाण पत्र भी बनवाया हुआ है जो स्वास्थ्य विभाग की जांच एवं कार्यों पर सवालिया निशान उठा रहा है। अमर शहीद उमानाथ सिंह जिला चिकित्सालय में जांच के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय द्वारा प्रमाणित कर दिया गया कि वह 100 फीसदी अंधा है जिसको पूर्ण अंधे होने का प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया गया है। बता दें कि यह अंधा व्यक्ति ज्ञानदत्त शुक्ल पुत्र लाल शंकर शुक्ल निवासी हरबसपुर थाना लाइन बाजार है जिसने सरकार की आंख में धूल छोंक कर शासन द्वारा दी जाने वाली सभी सुविधाओं का लाभ पूर्ण रूप से उठा रहा है जबकि वास्तविकता कुछ और है जो ज्ञानदत्त के कार्यों से बखूबी उजागर हो रहा है। उसे देखने वालों की मानें तो प्रातः वह साइकिल चलाकर बाजार करता है तथा समाचार पत्र पढ़ने के साथ अन्य मोटे-महीन कामों को बखूबी ढंग से करता है। यहां तक कि न्यायालय में चिपकायी गयी सूची पढ़कर वह अपने तारीख को देखता है तथा यहां अकेले साइकिल या किसी अन्य सवारी से आता है और केश की पैरवी करने के साथ ही अन्य कार्य को किसी सामान्य व्यक्ति की तरह ही करता है। सवाल यहां यह उठता है कि उक्त व्यक्ति की मेडिकल जांच किस प्रकार करके पूर्णरूपेण अंधा होने का प्रमाण पत्र दे दिया गया? विभागीय सूत्रों की मानें तो उक्त व्यक्ति का रजिस्टेªशन नम्बर 63418 है जो 17 अगस्त 2009 को जांचोपरांत जनपद के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किया गया है तथा उसके प्रमाण पत्र की संख्या 7 है।
