विदेशी संत की शिव भक्ति अस्पताल बन गया मंदिर

वाराणसी. मंडलीय हॉस्पिटल का जनरल वार्ड इन दिनों लिथुआनिया (उत्तरी यूरोप) से आए विदेशी बाप बेटे की वजह से मंदिर बन गया है। काशी में अध्यात्म और शांति की तलाश में आए जेफिम का पैर बीस दिनों पहले एक दुर्घटना में टूट गया था। निजी हॉस्पिटलों के महंगे इलाज के चलते जेफिम सरकारी हॉस्पिटल में भर्ती हो गए। वे दोनों भगवान शंकर के बहुत बड़े भक्त हैं, इन्होंने जनरल वार्ड को मंदिर बना दिया है। वार्ड में बकायदा प्रभु के भजन के साथ भोग भी लगाया जाता है। दस साल का जेफिम का बेटा राम भी इस काम में अपने पिता का पूरा साथ देता है।
 लिथुआनिया के रहने वाले जेफिम ने बताया कि वह भारत भ्रमण पर सालों पहले निकले है। उनके साथ उनका बेटा राम भी है। इसने वृंदावन में गुरुकुल पद्धति से कुछ शिक्षा भी ग्रहण की है। दोनों चेन्नई, बंगलौर और उड़ीसा समेत कई जगहों पर भ्रमण करने के बाद वृंदावन में काफी दिनों से रह रहे हैं। काशी भ्रमण के दौरान ही जेफिम की बीस दिन पहले पैर की हड्डी टूट गई थी। जेफिम के दस वर्षीय बेटे राम ने बताया कि उसको अपने देश कि भाषा के अलावा हिंदी और थोड़ी बहुत संस्कृत भी आती है। आगे उसने बताया कि मां ने देश में दूसरी शादी कर ली है। पिता के साथ वह भारत आ गया। उनकी महादेव में बहुत आस्था है। वह बीमार होने के बावजूद सुबह शाम पूजा और भोग लगाते हैं।
 तीमारदार सोनू ने बताया कि ऐसा भक्ति भाव बहुत कम ही देखने को मिलता है। जिस बेड पर जेफिम लेटा है, उसके आस-पास मानो पूरा मंदिर बन गया है। भगवान शंकर, सूर्य, मां दुर्गा और भगवान कृष्ण के कैलेण्डर लगे हए हैं। अवधेश ने बताया कि दोनों भजन भी अच्छा करते हैं।

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