सुसन्तान उत्पत्ति से समाजिक कष्टों से मुक्ति
https://www.shirazehind.com/2014/02/blog-post_2727.html
श्रीश्री ठाकुर के जन्मोत्सव पर निकली शोभायात्रा
युग पुरुषोत्तम श्रीश्री ठाकुर अनुकूल अनुकूल चन्द्र जी का जन्मोत्सव स्थानीय सत्संग केन्द्र के तत्वावधान मेें रविवार को धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर शहर में भव्य शोभा यात्रा निकाली गयी। जिसमें गुरूभाई और मातायें हरिबोल , राधा बोल पर झूमते नाचते चल रही थी। टीडीपीजी कालेज के महाराणा प्रताप व्यायाम शाला से सवेरे 9 बजे शोभा यात्रा का शुभारंभ हुआ। बैण्ड बाजा, बग्घी पर रखे ठाकुर जी के विशाल चित्र साथ सैकड़ों लोग भजन कीर्तन करते हुए बीआरपी इण्टर कालेज, रोडवेज, जोगियापुर होते हुए ओलन्दगजंज , शाहीपुल, चहारसू से सद्भावना पुल से वापस हुए। इसके बाद विद्वान वक्ताओं ने ठाकुर जी के दिव्य जीवन भावधारा पर व्याखान आयोजित किया गया। व्याख्यान में वक्ताओं ने बताया है कि श्रीश्री ठाकुर ने कहा कि ईष्ट या गुरूमुखी चलन से साधन द्वार मन को जिसने नियंत्रित कर लिया उसी के आचरण एवं व्यवहार से एक सुखी व सानन्द जीवन व्यतीत कर सकते हैं। उसी के आधार पर व्यक्तिगत व समष्टिगत समस्याओं का चरम समाधान भी हो सकता है। मन को नियंत्रित करने की विधि एक सिद्ध व सुनियंत्रित मनवाला गृहस्थ एक गुरू ही अपने वातावरण द्वारा बता सकता है। मनमुखी चलन से व्यक्ति पतनोन्मुख हो जाता है। जबकि गुरूमुखी होने से व्यक्ति का सर्वाधिक विकास हो जाता है। दीक्षा लेकर उसके अनुसार साधना करके जीन में सिद्धि प्राप्त की जा सकती है। मन को नियत्रित करने के लिए ही मंत्र की आवश्कता होती है। व्यक्ति पर उसके मन का ही शासन होता है। देवघर से आये ऋत्विकों ने बताया कि ठाकुर जी के बताये यजन, याजन और ईष्टभृत्ति के माध्यम से जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है। किन्तु सबके मूल में चाहिए ईष्टानुराग। अनुरक्त हृदय से उन्हे अनुशरण करने पर मनुष्य प्रकृत मंगल का अधिकारी होगा ही। अपने को बचना और दूसरों को ही बढ़ाना ही वास्तविक धर्म है। जब तक सुसन्तान की उत्पत्ति नहीं होगा समाज से कष्ट दूर नहींे होगा। माताओं का यह कर्तव्य है कि वे पति के प्रति समर्पित भावना रखे, इससे बच्चों में कर्तव्यपालन की भावना का विकास होगा और हर घर में राम और कृष्ण पैदा होगें। इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोगों ने दीक्षा ली और ठाकुर के बताये मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। देवघर झारखण्ड से पधारे एसपीआर प्रीतम सिंह ने ठाकुर जी के बारे में प्रकाश डाला। संचालन सत्संग केन्द्र के सचिव काली प्रसाद एडवोकेट ने किया। इस अवसर पर आस पास के जिलों से गुरूभाई और अनेक गण्यमान्य लोग मौजूद रहे।
युग पुरुषोत्तम श्रीश्री ठाकुर अनुकूल अनुकूल चन्द्र जी का जन्मोत्सव स्थानीय सत्संग केन्द्र के तत्वावधान मेें रविवार को धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर शहर में भव्य शोभा यात्रा निकाली गयी। जिसमें गुरूभाई और मातायें हरिबोल , राधा बोल पर झूमते नाचते चल रही थी। टीडीपीजी कालेज के महाराणा प्रताप व्यायाम शाला से सवेरे 9 बजे शोभा यात्रा का शुभारंभ हुआ। बैण्ड बाजा, बग्घी पर रखे ठाकुर जी के विशाल चित्र साथ सैकड़ों लोग भजन कीर्तन करते हुए बीआरपी इण्टर कालेज, रोडवेज, जोगियापुर होते हुए ओलन्दगजंज , शाहीपुल, चहारसू से सद्भावना पुल से वापस हुए। इसके बाद विद्वान वक्ताओं ने ठाकुर जी के दिव्य जीवन भावधारा पर व्याखान आयोजित किया गया। व्याख्यान में वक्ताओं ने बताया है कि श्रीश्री ठाकुर ने कहा कि ईष्ट या गुरूमुखी चलन से साधन द्वार मन को जिसने नियंत्रित कर लिया उसी के आचरण एवं व्यवहार से एक सुखी व सानन्द जीवन व्यतीत कर सकते हैं। उसी के आधार पर व्यक्तिगत व समष्टिगत समस्याओं का चरम समाधान भी हो सकता है। मन को नियंत्रित करने की विधि एक सिद्ध व सुनियंत्रित मनवाला गृहस्थ एक गुरू ही अपने वातावरण द्वारा बता सकता है। मनमुखी चलन से व्यक्ति पतनोन्मुख हो जाता है। जबकि गुरूमुखी होने से व्यक्ति का सर्वाधिक विकास हो जाता है। दीक्षा लेकर उसके अनुसार साधना करके जीन में सिद्धि प्राप्त की जा सकती है। मन को नियत्रित करने के लिए ही मंत्र की आवश्कता होती है। व्यक्ति पर उसके मन का ही शासन होता है। देवघर से आये ऋत्विकों ने बताया कि ठाकुर जी के बताये यजन, याजन और ईष्टभृत्ति के माध्यम से जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है। किन्तु सबके मूल में चाहिए ईष्टानुराग। अनुरक्त हृदय से उन्हे अनुशरण करने पर मनुष्य प्रकृत मंगल का अधिकारी होगा ही। अपने को बचना और दूसरों को ही बढ़ाना ही वास्तविक धर्म है। जब तक सुसन्तान की उत्पत्ति नहीं होगा समाज से कष्ट दूर नहींे होगा। माताओं का यह कर्तव्य है कि वे पति के प्रति समर्पित भावना रखे, इससे बच्चों में कर्तव्यपालन की भावना का विकास होगा और हर घर में राम और कृष्ण पैदा होगें। इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोगों ने दीक्षा ली और ठाकुर के बताये मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। देवघर झारखण्ड से पधारे एसपीआर प्रीतम सिंह ने ठाकुर जी के बारे में प्रकाश डाला। संचालन सत्संग केन्द्र के सचिव काली प्रसाद एडवोकेट ने किया। इस अवसर पर आस पास के जिलों से गुरूभाई और अनेक गण्यमान्य लोग मौजूद रहे।

