धर्म की स्थापना के लिये होता है प्रभु का अवतारः प्रशांत जी
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जौनपुर। इस जग में प्रेम बहुत बड़ी चीज है। ईश्वर के बाद यदि कोई महान वस्तु है तो वह प्रेम है। ईश्वर और प्रेम एक-दूसरे के पूरक होते हैं। समाज में लोग एक-दूसरे से द्वेष करते हैं, ऊंच-नीच एवं जाति-पाति का व्यवहार रखते हैं, अपने स्वार्थवश दूसरों को नीचा दिखाने का प्रयास करते हैं, वह बहुत बड़े मूर्ख होते हैं। वह अज्ञानतावश अपना प्यारा जीवन ही व्यर्थ कर बैठते हैं। एक-दूसरे के साथ मिल-जुलकर प्रेमपूर्वक रहने से ही सच्चा, सफल व सार्थक जीवन होता है। उक्त बातें खुटहन क्षेत्र के अकबरपुर गांव निवासी कृष्ण कुमार सिंह के आवास पर चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के चैथे दिन शनिवार को प्रशांत जी महाराज ने कही। उन्होंने कहा कि धरती पर जब-जब अत्याचार व अधर्म बढ़ा है, तब-तब प्रभु धरती पर अवतार लेकर धर्म की स्थापना करके सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा दिये हैं। इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इसी क्रम में कथा वाचक ने भक्त प्रहलाद, वामन चरित्र, रामचरित्र का सजीव वर्णन कर उपस्थित लोगों को भाव-विभोर कर दिया। इस अवसर पर रामदेव दूबे, अजय सिंह, कमलेश सिंह, सुरेश गुप्ता, देवमणि दूबे सहित सैकड़ों गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। आयोजक ने सभी के प्रति आभार जताया।

