जौनपुर में बोर्ड परीक्षा की शुचिता को तार-तार करने पर आमादा हैं नकल माफिया
https://www.shirazehind.com/2014/03/blog-post_1929.html
जौनपुर। माध्यमिक शिक्षा परिषद इलाहाबाद द्वारा संचालित हाईस्कूल व इण्टरमीडिएट की वार्षिक परीक्षा 3 मार्च से शुरू है जिसके मद्देनजर नकल के भरोसे परीक्षा रूपी वैतरणी पार उतरने का ख्वाब देखने वाले परीक्षार्थियों ने जुगाड़ लगाना शुरू कर दिया है और वे नकल माफियाओं की गणेश परिक्रमा करने में लग गये है। परीक्षा को शुचिता व पारदर्शिता एवं नकलमुक्त ढंग से सम्पन्न कराने के शासन-प्रशासन के तमाम दावों के बावजूद जनपद में सालों से नकल माफिया सक्रिय हैं। जरूरतमंद परीक्षार्थियों से नकल की सुविधा के एवज में रूपया लेकर उन्हें जुगाडि़या बैसाखी के सहारे उत्तीर्ण कराने के ठेकेदारों का धंधा कई सालों से बेखौफ फल-फूल रहा है। इनका छात्रों को नकल की सुविधा उपलब्ध कराने का तरीका आवश्यकता व धनराशि के अनुसार अलग-अलग मुकर्रर है। यदि किसी छात्र को परीक्षा काल में चिट, पुर्जी आदि की जरूरत है तो उसका रेट अपेक्षाकृत कम है। यदि किसी को साल्वर की आवश्यकता है तो उसका रेट इससे कुछ ज्यादा है। इस स्थिति में वास्तविक परीक्षार्थी दिखाने के लिये परीक्षा कक्ष में बैठा रहता है जहां विभागीय अधिकारियों, केन्द्र व्यवस्थापकों व कक्ष निरीक्षकों से सेटिंग कर साल्वर की व्यवस्था कर दी जाती है। परीक्षा समाप्त होने के 4-6 मिनट पहले परीक्षार्थी के नाम पर लिखी गयी उत्तरपुस्तिका परीक्षा कक्ष में चुपचाप जमा करा दी जाती है। यदि छात्र वार्षिक परीक्षा में सम्मिलित नहीं होना चाहता है तो नकल माफियाओं के पास इसका भी जुगाड़ू इंतजाम है। इसमें परीक्षार्थी को केवल परीक्षा फार्म भरकर विद्यालय कार्यालय में जमा कर देना पड़ता है तथा परीक्षा कक्ष में उसके स्थान और नाम पर किसी साल्वर को बिठाकर बोर्ड परीक्षा दिलवा दी जाती है। परीक्षा परिणाम घोषित होने के उपरान्त अंक तालिका, सनद, स्थानांतरण प्रमाण पत्र परीक्षार्थी के नाम पते पर रजिस्टर्ड डाक से भिजवा दी जाती है। इसका रेट सबसे ज्यादा है। यह परीक्षार्थी की आवश्यकता तथा परिस्थति पर निर्भर करता है कि उसे कौन सी सुविधा चाहिये। जरूरत के हिसाब से वह मुंहमांगी रकम अदा करता है तथा मनचाही सुविधा प्राप्त करता है। यह नकल माफियाओं की कारस्तानी, विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत एवं चढ़ावे का कमाल है कि जनपद में हर साल ब्लैक लिस्टेड (काली सूचीबद्ध) परीक्षा केन्द्रों को भी परीक्षा केन्द्र घोषित कर दिया जाता है, ताकि इस मनचाहे परीक्षा केन्द्र का लाभ नकल माफियाओं व नकलचियों को खुल्लमखुल्ला हासिलों नसीब हो सके। बैच चेकिंग के नाम पर भी विभागीय अधिकारियों द्वारा परीक्षा केन्द्रों से वसूली की जाती है। इन परीक्षा केन्द्रों में इन्हीं कारणों से न केवल जनपद नहीं, बल्कि गोरखपुर, श्रावस्ती, गोण्डा, बहराइच, संत कबीरनगर, छत्रपति साहू जी महराजनगर, कौशाम्बी सन्त रविदासनगर (भदोही) जैसे दूर-दराज के जनपदों तक के छात्र परीक्षा फार्म भरकर माध्यमिक परीक्षा में सम्मिलित होने के लिये हर साल आते हैं। इस प्रकार परीक्षा की शुचिता व पारदर्शिता के तमाम सरकारी दावों के बीच नकल माफिया ‘तू डाल-डाल, मैं पात-पात’ वाली कहावत चरितार्थ कर रहे हैं। प्रदेश में किसी पार्टी की सरकार हो, कोई भी ‘ऐरू-गरू नत्थू खैरू’ मुख्यमंत्री के ओहदे पर विराजमान हो, इससे उनकी तंदुरूस्ती पर कोई असर नहीं पड़ता और उनका विभागीय सेटिंग से नकल कराने का गोरखधंधा बेखौफ फलता-फूलता रहता है। यह हाल उस देश का है जहां वाग्देवी वीणापाणि मां सरस्वती की उपासना की जाती है तथा विद्यालयों को पवित्र विद्या मन्दिर माना जाता है। जिस देश में शिक्षा व परीक्षा की शुचिता एवं गुणवत्ता के साथ मौन विभागीय सहमतिपूर्वक बेखौफ खिलवाड़ किया जा रहा हो, उसका भविष्य क्या और कैसा होगा, यह जगजाहिर है।
