जज्बे को सलाम: सात साल के मासूम ने पिता संग मिलकर बचाई 11 लोगों की जान

गाजीपुर. सात साल के बच्चे की हिम्मत और सूझबूझ से 11 लोगों को मौत के मुंह में जाने से रोका जा सका। इस नन्हे मासूम ने उस रेस्क्यू ऑपरेशन की जिम्मेदारी अपने हाथ में ली, जिसमें 12 लोगों की जिंदगियां दांव पर लगी थीं। बेटी की शादी के बाद गंगा में आर-पार का सेहरा चढ़ाने जा रहे लोगों से भरी नाव करंडा क्षेत्र के सिकंदरपुर घाट के सामने पलट गई। इस दौरान नाव में सवार एक महिला की डूबने से मौत हो गई। बाकी ग्यारह लोगों को सात साल के सूरज की सूझबूझ और हिम्मत ने बचा लिया। घटना नौ जून की है, जब गंगा मां को सेहरा चढ़ाने के लिए 12 लोगों का एक दल करंडा क्षेत्र के सिकन्दरपुर गंगाघाट से नाव पर चला। नन्हें सूरज ने बताया, 'थोड़ी ही देर में नाव का संतुलन बिगड़ा और लोग चिल्लाने लगे। बीच मझधार में पहुंचकर उनकी नाव अचानक पलट गई। बगल की दूसरी नाव से मैंने मौत के मंजर को देखा और कहा, अरे पापा, वह नाव डूब रही है। चलिए उन्हें बचाना है। ऐसा सुनते ही सूरज के पिता बहादुर ने अपनी नाव तेजी से लेकर उस स्थान पर पहुंचे, जहां देखते-देखते नाव डूब गई थी। लोग जान बचाने के लिए पानी में संघर्ष कर रहे थे। इस रेस्क्यू ऑपरेशन में जहां सूरज ने नाव की कमान संभाली, वहीं उसके पिता अशोक (बहादुर) ने पानी में कूदकर लोगों को नाव तक पहुंचाने का जिम्मा लिया। नाव में कुल सात महिलाएं/लड़कियां और चार पुरुष थे। चार लोग हाथ पांव मार रहे थे, जिन्हें अशोक ने पकड़-पकड़ कर अपनी नाव में डाला। शेष को पानी के भीतर से निकालकर नाव में पहुंचाया। वहीं, मासूम सूरज अपने पापा को बताता जा रहा था कि पापा यहां एक है, वहां एक डूब रहा है। मुर्दा जैसे लोगों को अशोक ने बारी-बारी अपनी नाव में डाला। सूरज नाव में डाले गए लोगों के हाथ-पैर सीधा कर उनके पेट को दबा दबाकर पानी निकाला। इसके अलावा उसने बेसुध पड़े लोगों को मुंह से आक्सीजन भी देता रहा।

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