घर की शान माने जाने वाला कुए का अस्तित्व खतरे में
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मुंगराबादशाहपुर(जौनपुर)।नये युग में हैंडपंप के प्रयोग मे आयी अधिकता के चलते गांवो के दरवाजों की शान के रूप मे वने कुंओ का अस्तित्व धीरे.धीरे समाप्त होने की ओर अग्रसर है।
अर्द्धशतक पूर्व गांवो ही नही वरन नगरो मे भी कुआ पेयजल का प्रमुख श्रोत माना जाता था।उन दिनो कुंओ का घरो के सामने बना होना लोगो के शानो शौकत मे चार चांद लगा देता था।लेकिन समय ने करवट बदला और नये अविष्कार के चलते लगभग दो तीन दशक पूर्व हैंडपंपो के आते ही कुंओ का प्रयोग धीरे.धीरे कम होने लगा।इसी के साथ ही किसी जमाने मे गांवो के लोगो की जरूरतों को पूरा कर रहे कुंए आज नयी सहस्राब्दि मे काफी हद तक समाप्त हो गये।जो इक्का दुक्का अनेक गांवो मे शेष भी हैं।वो भी अपनी जर्जरता पर तरस खाने को विवश हैं।अव नये सुविधा के आगे कोइ ग्रामीण कुंओ की मरम्मत कराना तो दूर पानी लेने भी नही जाते हैं।
गौरतलब है कि किसी जमाने मे पानी पीने से लेकर खेतो की सिचाई तक लोग कुए से ही करते थे।बैलो के द्वारा लोग नार मोट से खेतो की सिचांई व रस्सी मे बाल्टी तथा गगरा बांध कर पीने का पानी निकालते थे।आज नार मोट व गगरा जैसी वस्तुएं धरोहर की चीजे हो गयी हैं।ग्रामीणेा के मुताबिक अव तो उन दिनो की यादें ही संजोना शेष है।उस जमाने मे एक कंुआ का निर्माण करवाना पुण्यकारी माना जाता था।कुंआ निर्माता को परोपकारी व्यक्ति की संज्ञा दी जाती थी।इसकी लागत भी काफी थी।इसका प्रयोग लोग पेयजल के साथ ही धार्मिक अवसरों पर परम्परानुसार अनुश्ठानो हेतु भी करते थे।एक बुर्जुग ग्रामीण ने उन दिनो की याद ताजा करते हुए बताया कि उन दिनो यदि किसी को कुत्ता काट लेता था तो वह सात कुंओ को झाकने की और पानी पीने की परंपरा का निर्वाह करता था।‘हम लोग उस जमाने मे कभी कल्पना ही नही किये थे कि बटन दवाते ही पानी बाहर आ जायेगा और खेतो की सिंचाई सरलता से होगी।उन दिनो नये कुओ मे पानी को मीठा बनाने हेतु गुड डाला जाता था।इसी परिपेक्ष्य मे एक रस्सी विक्रेता ने बताया कि आज कुंओ से पानी निकालने के लिए रस्सी न के बराबर बिकती है।
उल्लेखनीय है कि जहां पुराने लोग आज भी कंुओ को अच्छा मानते हुए तमाम खूबियां गिनाते हैं।वही नयी पीढी के लोग हैंडपंप को बेहतर कहते हैं।अव तो कुछ लोगो के घरों मे समरसेबल तक देखने को मिलते हैं।बुजुर्ग ग्रामीणो का मानना है कि आज कुंओ की मरम्मत शासन के स्कीम मे भले हो जाय किंतु लोग निजी धन से न के बराबर कराते हैं।कुछ गांवो मे कुंओ तक मे लगे हैंडपंप देखने को मिल जाते हैं।
फिलहाल ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियो के प्रत्येक आयु वर्ग के लोगों की सुविधाओं व सुगमता मे भले ही भिन्नता हो ।लेकिन आज नये युग व परिवेश के चलतंे कुंओ का अस्तित्व समापन के कगार पर लोगो को नजर आ रहा है।
