पितृ विसर्जन पर पूर्वजों को याद करके किया गया श्राद्ध तर्पण
https://www.shirazehind.com/2014/09/blog-post_887.html
गायत्री शक्तिपीठ पर महिला-पुरूषों ने किया सामूहिक श्राद्ध कर्म
जौनपुर। पूर्वजों को याद करने का दिन पितृ विसर्जन पर मंगलवार को लोग श्राद्ध तर्पण किये जिसके चलते गोमती, सई सहित अन्य जलाशयों के किनारे सुबह से ही पूर्वजों को तर्पण करने वालों की भीड़ उमड़ी रही। मान्यता है कि प्रत्येक अमावस्या पितरों की पुण्यतिथि होती है, मगर आश्विन मास की अमावस्या पितरों के लिये परम फलदायी मानी गयी है। इस अमावस्या को सर्व पितृ विसर्जनी अमावस्या अथवा महालया के नाम से भी जाना जाता है। पिछले 15 दिन तक अपने पूर्वजों को जल देने वाले लोग मंगलवार को दोनिया का अर्पण किया गया। इसके पहले दाढ़ी-बाल बनवाकर लोग सुबह स्नान आदि किये तथा इसके पश्चात् दाल, चावल, पूड़ी, सब्जी, बरा आदि पकवान बनाकर पूर्वजों को चढ़ाकर उन्हें याद किये। गोमती नदी सहित तालाब, पोखरे आदि के किनारे पूर्वज के नाम पर पूजा किया गया। तत्पश्चात् गाय, कौवा, कुत्ता को भोजन कराया गया। देखा गया कि गोपी घाट, विसर्जन घाट, केरारवीर घाट, हनुमान घाट, पांचो शिवाला घाट, सूरज घाट सहित अन्य घाटों पर श्राद्धकर्ता पूर्वाभिमुख खड़े होकर हाथ में तिल, त्रिकुश, जल लेकर संकल्प कर पंचबलि दानपूर्ण ब्राह्मण को भोजन कराये।
इसी क्रम में नगर के लाइन बाजार में स्थित गायत्री शक्तिपीठ पर सर्वपितृ अमावस्या पर सामूहिक श्राद्ध कर्म एवं पिण्डदान सम्पन्न हुआ जहां सैकड़ों की संख्या में महिला व पुरूषों ने पितरों का पिण्डदान करके श्रद्धा कर्म किया। इस मौके पर परिव्राजक राजेश जी ने पितरों को समर्पित गीत व वेद-मंत्रों के विधि-विधान से समस्त कार्य सम्पन्न कराया जहां उन्होंने कहा कि देव ऋण व ऋषि ऋण से बड़ा पितृ ऋण होता है, इसलिये इसे चुकाना हमारा कर्तव्य है। हिन्दू धर्म में पितरों के प्रति श्रद्धा कृतज्ञता प्रकट करने के लिये वर्ष में 15 दिन का समय दिया गया है। इस अवसर पर विश्वनाथ सिंह, इन्द्रपति मिश्र, दिलीप श्रीवास्तव, भरत जी मिश्र, डीके तिवारी, शशि सिंह, अनिल गोयल, रूक्मणी, शिवकुमार, डा. शैलेश सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
जौनपुर। पूर्वजों को याद करने का दिन पितृ विसर्जन पर मंगलवार को लोग श्राद्ध तर्पण किये जिसके चलते गोमती, सई सहित अन्य जलाशयों के किनारे सुबह से ही पूर्वजों को तर्पण करने वालों की भीड़ उमड़ी रही। मान्यता है कि प्रत्येक अमावस्या पितरों की पुण्यतिथि होती है, मगर आश्विन मास की अमावस्या पितरों के लिये परम फलदायी मानी गयी है। इस अमावस्या को सर्व पितृ विसर्जनी अमावस्या अथवा महालया के नाम से भी जाना जाता है। पिछले 15 दिन तक अपने पूर्वजों को जल देने वाले लोग मंगलवार को दोनिया का अर्पण किया गया। इसके पहले दाढ़ी-बाल बनवाकर लोग सुबह स्नान आदि किये तथा इसके पश्चात् दाल, चावल, पूड़ी, सब्जी, बरा आदि पकवान बनाकर पूर्वजों को चढ़ाकर उन्हें याद किये। गोमती नदी सहित तालाब, पोखरे आदि के किनारे पूर्वज के नाम पर पूजा किया गया। तत्पश्चात् गाय, कौवा, कुत्ता को भोजन कराया गया। देखा गया कि गोपी घाट, विसर्जन घाट, केरारवीर घाट, हनुमान घाट, पांचो शिवाला घाट, सूरज घाट सहित अन्य घाटों पर श्राद्धकर्ता पूर्वाभिमुख खड़े होकर हाथ में तिल, त्रिकुश, जल लेकर संकल्प कर पंचबलि दानपूर्ण ब्राह्मण को भोजन कराये।
इसी क्रम में नगर के लाइन बाजार में स्थित गायत्री शक्तिपीठ पर सर्वपितृ अमावस्या पर सामूहिक श्राद्ध कर्म एवं पिण्डदान सम्पन्न हुआ जहां सैकड़ों की संख्या में महिला व पुरूषों ने पितरों का पिण्डदान करके श्रद्धा कर्म किया। इस मौके पर परिव्राजक राजेश जी ने पितरों को समर्पित गीत व वेद-मंत्रों के विधि-विधान से समस्त कार्य सम्पन्न कराया जहां उन्होंने कहा कि देव ऋण व ऋषि ऋण से बड़ा पितृ ऋण होता है, इसलिये इसे चुकाना हमारा कर्तव्य है। हिन्दू धर्म में पितरों के प्रति श्रद्धा कृतज्ञता प्रकट करने के लिये वर्ष में 15 दिन का समय दिया गया है। इस अवसर पर विश्वनाथ सिंह, इन्द्रपति मिश्र, दिलीप श्रीवास्तव, भरत जी मिश्र, डीके तिवारी, शशि सिंह, अनिल गोयल, रूक्मणी, शिवकुमार, डा. शैलेश सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
