मुस्लिम महिला बनी मिसाल, हिंदू धर्म ग्रंथों का उर्दू में कर रही है अनुवाद
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वाराणसी। गंगा-जमुनी तहजीब का शहर काशी हिंदुओं और मुस्लिमों
की भावनाओं को हमेशा जोड़ने का काम करता है। यहां के आपसी भाईचारे और
सांप्रदायिक सौहार्द की देश-विदेश में मिसाल दी जाती है। यहां के सर्वधर्म
सद्भाव की सदियों पुरानी परंपरा को अब नाजनीन अंसारी मजबूती देने का काम कर
रही हैं। मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखते हुए भी उन्होंने कई हिंदू
धार्मिक पुस्तक का उर्दू में अनुवाद किया है। इसमें रामचरित्र मानस, हनुमान
चालीसा, दुर्गा पाठ सहित कई हिंदू धार्मिक श्लोक शामिल है। इसके पीछे उनका
मकसद सिर्फ दोनों धर्मों के बीच बनी खाई को पाटना है।
नाजनीन इस समय राम चरित्र मानस का उर्दू में अनुवाद करने में लगी हुई
हैं। उन्होंने बालकांड से लेकर सुंदर कांड तक अनुवाद भी कर लिया है। नाजनीन
ने बताया कि वे इसके पहले हनुमान चालीसा, दुर्गा चालीसा और साईं चालीसा का
भी उर्दू में अनुवाद कर चुकी हैं। इसके साथ ही वह अकबर के जीवन वृत्त को
पढ़कर राम आरती का भी उर्दू में अनुवाद कर चुकी हैं। वे बड़े ही सादगी के
साथ भगवान राम की मूर्ति के सामने बैठकर नियमित अनुवाद करती हैं।
नाजनीन इग्नू से पढ़ाई भी कर रही हैं। इसके बाद जो समय बचता है, वो
भगवान के धर्म ग्रंथों और आरती के अनुवाद में लगाती हैं। उन्होंने बताया कि
वह मुस्लिम महिला फाउंडेशन की अध्यक्ष भी हैं। दोनों धर्मों के रिश्तों
में सुधार के लिए वे भगवान के ग्रंथों और आरतियों का अनुवाद कर रही हैं।
बीएचयू हिस्ट्री डिपार्टमेंट के प्रो. डॉ राजीव श्रीवास्तव ने बताया
कि 400 साल पहले मुगल सम्राट अकबर ने अपने धर्म ग्रंथों के प्रति प्रेम को
लेकर एक अनुवाद विभाग की स्थापना तक की थी। मुगल काल हिंदू-मुस्लिम समन्वय
का युग था। उन्होंने कहा कि संकट प्रबंधन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान के बारे
में तुलसी कृत रामचरित मानस का नाजनीन द्वारा उर्दू में अनुवाद देश में चल
रहे संकट को दूर करने में सहायक साबित हो सकता है।

