मुस्लिम महिला ने बनवाया महादेव का मंदिर, रोज करती हैं पूजा
https://www.shirazehind.com/2014/12/blog-post_73.html
छह दिसंबर इतिहास का वह दिन है जब मंदिर और मस्जिद को लेकर दो
मजहबों के बीच लकीर खींच गई थी। फिर भी समाज में ऐसे लोग हैं, जिन्होंने
गंगा-जमुनी तहजीब को बचाने के लिए मिसाल कायम किया है। ऐसा ही एक नाम है
नूर फातिमा, जो पेशे से वकील हैं। इन्होंने मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक
रखने के बावजूद काशी के पहाड़ी गेट के पास भगवान शिव का भव्य मंदिर
बनवाया है, जो अमन का पैगाम देता है। यहीं नहीं, वह पांचों वक्त नमाज के
साथ शिव की पूजा भी करती हैं।
नूर फातिमा ने बताया कि साल 2004 में उन्हें सपने में मंदिर दिखाई
दिया, लेकिन इस पर उन्होंने कोई ध्यान नहीं दिया। इसी तरह कई दिनों तक वह
महादेव के मंदिर और उसमें सफ़ेद माला चढ़ाकर आराधना करने का दृश्य सपने में
देखती रहीं। फिर भी इसे भ्रम मानते हुए अनदेखी करती रहीं। फातिमा के
अनुसार, कुछ दिनों बाद उनकी पति की एक दुर्घटना में मौत हो गई। तब उन्हें
लगा कि भगवान शिव ने उन्हें दर्शन देकर हकीकत में आराधना को बोला था।
27 नवंबर 2004 को मंदिर के लिए नूर फातिमा ने पहली ईंट अपने हाथों से रखीं।
पांच महीने बाद पहाड़ी गेट के पास आठ मार्च 2005 को भगवान शिव का मंदिर
बनकर तैयार हो गया। तब से लेकर आज भी नूर फातिमा रोज भगवान शिव को सफ़ेद
फूल की माला चढ़ाकर पूजा करती हैं। उन्होंने बताया कि भगवान और अल्लाह सब
एक हैं। शांति और अमन देश में रहना चाहिए उनकी यही कामना है।
नूर फातिमा ने बताया कि इंसान में भेदभाव नहीं होना चाहिए। किसी घटना
को याद कर उस मंजर को लोगों के सामने प्रस्तुत नहीं करना चाहिए, बल्कि देश
में मिसाल बने लोगों का जिक्र करना चाहिए, जिन्होंने मजहबों को जोड़ा है।
मदनपुरा के अफजल अंसारी ने बताया कि नूर फातिमा सांप्रदायिक सौहार्द्र की
प्रतीक है। वहीं, शकील का कहना है कि सोच बड़ी होगी तभी नफरत की खाई कम
होगी। फातिमा से देश के दहशतगर्दों को सीख लेनी चाहिए और सच्चे राह पर चलना
चाहिए।

