‘कौन कहता है आसमान में सुराख नहीं हो सकता’......
https://www.shirazehind.com/2014/12/blog-post_40.html
जौनपुर। ‘कौन कहता है आसमान में सुराख नहीं हो सकता, तबियत से तो एक पत्थर उछालो यारो।’ दुष्यंत कुमार की इस पंक्ति को यथार्थ कर दिखाया है जनपद के धर्मापुर गांव निवासी दिलीप यादव ने। इस युवा ने एक बार नहीं, बल्कि 3 बार संगीत विषय में नेट परीक्षा उत्तीर्ण कर कीर्तिमान स्थापित किया है। इस युवा ने नेट के साथ ही जेआरएफ भी उत्तीर्ण कर लिया है। सम्पूर्ण भारत से 15 प्रतिभागी सफल हुये हैं जिसमें जौनपुर का सपूत दिलीप यादव भी अपना स्थान बनाया। गर्व की बात यह है कि इस होनहार ने पूरे भारत में दूसरा स्थान प्राप्त कर जनपद का पहला जेआरएफ संगीत विषय का बना। धर्मापुर गांव निवासी लालजी यादव के पुत्र दिलीप पहले से ही होनहार विद्यार्थी रहा है जिसका प्रिय विषय संगीता रहा। दिलीप के प्रथम गुरू स्व. मंगला प्रसाद कौशल ने इन्हें संगीत का ककहरा सिखाया। उसके बाद देवेन्द्र पाठक लखनऊ और पं. विकास गंगाधर तैलंग जी ने इन्हें इस विधा में पारंगत किया। दिलीप न पत्र-प्रतिनिधियों को बताया कि हमारे प्रेरणास्रोत डा. ब्रजेश यदुवंशी का सुझाव था कि इस क्षेत्र में उच्च शिखा हासिल करके जनपद व परिवार का नाम ऊंचा करें। हमें खुशी है कि कड़ी मेहनत कर मैं जौनपुर का नाम राष्ट्रीय स्तर पर ऊंचा करके विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा आयोजित नेट परीक्षा उत्तीर्ण करके जनपद का पहला जेआरएफ बना। विदित हो कि इसके पहले इन्होंने 2012 व 2013 की नेट परीक्षा उत्तीर्ण की है। इस समय एशिया के प्रथम संगीत विश्वविद्यालय (इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय) खैरागढ़ (छत्तीसगढ़) से पीएचडी कर रहे हैं।

