अलाव की आंच को नम करती पेशावर की आतंकी घटना
https://www.shirazehind.com/2014/12/blog-post_740.html
भदोही। समूचे उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। उत्तर प्रदेश का पूर्वांंचल भी शीतलहर और कोहरे की बर्फीली ठंड में ठिठुर रहा है। लेकिन ठंड की ठिठुरन को संचार क्रांति तपिस पिघला रही है। दुनिया की हर छोटी बड़ी घटना अब ग्रामीण चैपाल की बहस का केंद्र बनती है।ं पाकिस्तान के पेशावर आर्मी स्कूल में हुए आतंकी हमले पर चर्चा भदोही के ग्रामीण चैपालों पर भी गूंज रही है। ग्रामीण अंचलों में शाम ढलते ही अलाव की आंच का आनंद लेते गांव के लोग आसपास के साथ देश दुनिया के अहम मसलों पर अपनी राय रखते हैं। आर्मी स्कूल के हमलों को गा्रमीणों ने मानवता के खिलाफ बताया है। लेकिन मुंबई हमले के दोषी शकीउर रहमान लखवी को पाकिस्तान की अदालत की तरफ से जमानत मिलने पर भी तिखी प्रक्रिया जाहिर की जा रही हैं।
भारत के ग्रामीण हिस्सों की स्थितियां बदल गयी हैं। अब किसान की झोपड़ी तक अखबार पहुंच रहा है। टीवी के जरिय खबरों के विस्फोट का असर गांवों के पढ़े लिखे युवकों पर भी पड़ रहा हैं। कम पढ़े लिखे लोग भी खबरों पर अब दिलचस्पी लेने लगे हैं। गांवों आम तौर पर दिन भर लोग खेती किसानी में व्यस्त रहते हैं। जबकि युवा पढ़ाई और अपने काम धंधे के लिए बाहर निकलते हैं। ठंड के मौसम में गांव में अलाव जलाई जाती है जहां आसपास के लोग अलाव की चैपाल पर जमा होते हैं। जहां राजनीति से लेकर सरकार और बड़ी घटनाएं पर चर्चा होती हैं। इस दौरान गांव के बूढे़ और बुजुर्गों के साथ पढ़े लिखे युवा भी शामिल होते हैं।े हरीपुर गांव में इसी तरह हर रोज अलाव की चैपाल पर लोग बैठते हैं और मीडिया में सुर्खियां बनी प्रमुख खबरों पर अपनी राय रखते हैं। पाकिस्तान के पेशावर की आतंकी घटना पर इंटरमीडिएट के छात्र पीयूष का कहना था कि आतंक वादियों की यह हरकत इंसानियत के खिलाफ है। स्कूली छात्रों ने भला क्या बिगाड़ा था। तभी बीए के छात्र प्रिंस ने कहा कि आतंकवाद से देश को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। आतंकवाद की जड़ बेहद गहरी हैं। पेशावर में आतंकी घटना को हमलावरों ने रेकी बाद अंजाम दिया हैं। तभी दूसरे युवक पवन ने कहा....अरे भाई अखबार देखि क त रोवाई आवत हौ....इ पढ़ी क त मन करत हो हम जाई और आतंकीन क मारि डाली...। लेकिन पाकिस्तान कम ना हउ...। उल्टे पाकिस्तान ने एक आतंकवादी को जमानत दे दिया हैं। इतना दर्द झेलने के बाद भी उसका नजरिया नहीं बदला है। तभी अलाव ताप रहे 45 वर्षीय नेमधर ने कहा कश्मीर में नहीं देखा कई दिन की लड़ाई के लिए भोजन लेकर आए थे आतंकी। वह सब पाकिस्तान का बना था। मुंबई के ताज होटल में नहीं देखा था आपने कई दिन तक आतंकवादी लड़ते रहे थे। लेकिन पाकिस्तान सुधरेगा नहीं। उसकी बयानबाजी सिर्फ दिखावा है। इस तरह गांव में शाम ढलते ही अलाव की तैयारी होने लगती है। शाम के बाद उसमें आग लगा दी जाती हैं और कुछ घरों के लोग आकर वहां विराजमान हो जाते हैं इसके बाद शुरु हो जाती है अखबार, टीवी और मोबाइल के जरिए मिले समाचारों की समीक्षा। यह सब बदलते भारत का नया रुप है। संचार क्रांति ने दुनिया को समेट दिया है। आज ग्रामीण की झोपड़ी तक अखबार और टीवी की पहुंच हो गई हैं मोबाइल ने यह सब और आसान बना दिया हैं।
भारत के ग्रामीण हिस्सों की स्थितियां बदल गयी हैं। अब किसान की झोपड़ी तक अखबार पहुंच रहा है। टीवी के जरिय खबरों के विस्फोट का असर गांवों के पढ़े लिखे युवकों पर भी पड़ रहा हैं। कम पढ़े लिखे लोग भी खबरों पर अब दिलचस्पी लेने लगे हैं। गांवों आम तौर पर दिन भर लोग खेती किसानी में व्यस्त रहते हैं। जबकि युवा पढ़ाई और अपने काम धंधे के लिए बाहर निकलते हैं। ठंड के मौसम में गांव में अलाव जलाई जाती है जहां आसपास के लोग अलाव की चैपाल पर जमा होते हैं। जहां राजनीति से लेकर सरकार और बड़ी घटनाएं पर चर्चा होती हैं। इस दौरान गांव के बूढे़ और बुजुर्गों के साथ पढ़े लिखे युवा भी शामिल होते हैं।े हरीपुर गांव में इसी तरह हर रोज अलाव की चैपाल पर लोग बैठते हैं और मीडिया में सुर्खियां बनी प्रमुख खबरों पर अपनी राय रखते हैं। पाकिस्तान के पेशावर की आतंकी घटना पर इंटरमीडिएट के छात्र पीयूष का कहना था कि आतंक वादियों की यह हरकत इंसानियत के खिलाफ है। स्कूली छात्रों ने भला क्या बिगाड़ा था। तभी बीए के छात्र प्रिंस ने कहा कि आतंकवाद से देश को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। आतंकवाद की जड़ बेहद गहरी हैं। पेशावर में आतंकी घटना को हमलावरों ने रेकी बाद अंजाम दिया हैं। तभी दूसरे युवक पवन ने कहा....अरे भाई अखबार देखि क त रोवाई आवत हौ....इ पढ़ी क त मन करत हो हम जाई और आतंकीन क मारि डाली...। लेकिन पाकिस्तान कम ना हउ...। उल्टे पाकिस्तान ने एक आतंकवादी को जमानत दे दिया हैं। इतना दर्द झेलने के बाद भी उसका नजरिया नहीं बदला है। तभी अलाव ताप रहे 45 वर्षीय नेमधर ने कहा कश्मीर में नहीं देखा कई दिन की लड़ाई के लिए भोजन लेकर आए थे आतंकी। वह सब पाकिस्तान का बना था। मुंबई के ताज होटल में नहीं देखा था आपने कई दिन तक आतंकवादी लड़ते रहे थे। लेकिन पाकिस्तान सुधरेगा नहीं। उसकी बयानबाजी सिर्फ दिखावा है। इस तरह गांव में शाम ढलते ही अलाव की तैयारी होने लगती है। शाम के बाद उसमें आग लगा दी जाती हैं और कुछ घरों के लोग आकर वहां विराजमान हो जाते हैं इसके बाद शुरु हो जाती है अखबार, टीवी और मोबाइल के जरिए मिले समाचारों की समीक्षा। यह सब बदलते भारत का नया रुप है। संचार क्रांति ने दुनिया को समेट दिया है। आज ग्रामीण की झोपड़ी तक अखबार और टीवी की पहुंच हो गई हैं मोबाइल ने यह सब और आसान बना दिया हैं।

