मुखबिरों पर नहीं दलालों का भरोसा
https://www.shirazehind.com/2014/12/blog-post_776.html
जौनपुर। सूचना तंत्र के अभाव में पुलिस का अपराधियों एवं अपराध पर कोई नियंत्रण नहीं रह गया है। इसी वजह से गंभीर अपराधों को अंजाम देने के बाद पुलिस के लाख प्रयास के बावजूद अभियुक्त उसके हत्थे नहीं चढ़ पाते। पुलिस का सबसे मजबूत सूचना तंत्र उसका मुखबिर होता है। जिसके आधार पर वह किसी मामले की तह में जाकर घटना का खुलासा आराम से कर लेती है। जिले में पुलिस के पास मुखबिरों का तंत्र नहीं दलालों का बड़ा संजाल हाबी है। जिसके अभाव में पुलिस ज्यादा वसूली में लगी रहती है। क्राइम ब्रान्च, कोबरा मोबाइल, अभिसूचना इकाई भी विभाग विभाग की मुसीबत को कम करने में कोई कारगर कदम नहीं उठा पा रही है। इसके पीछे भी मजबूत सूचना तंत्र का अभाव बताया जाता है। पता तो यहां तक चला है कि मुखबिरों पर खर्च करने के लिए आने वाला रूपया जिम्मेदार लोग डकार रहे है। पुलिस विभाग की सूत्रों की माने तो विभाग का सबसे मजबूत तंत्र उसके भरोसेमंद मुखबिर होते है। जो घटना के बाद विभागीय लोगों से अधिक सक्रिय हो कर अपराधियों के बारे में जानकारी एकत्रित कर पुलिस को उपलब्ध कराते है। पुलिस के पास मुखबिरों का मतबूत तंत्र हो तो घटनाओं की जानकारी पुलिस को पहले से हो सकती है। सूत्रों का कहना है कि इस समय उपेक्षा के चलते मुखबिरों ने पुलिस का सहयोग करना बन्द कर दिया है। जबकि पुलिस मुखबिरों के बजाय ऐसे दलालों को अधिक तरजीह दे रही है जो उनको ज्यादा से ज्यादा से माल कटवा सके। तमान ऐसे दलाल शहर के थानों और पुलिस चैकियों पर देखे जा सकते है। माननीयों की पैरवी पर थाना और चैकियों का प्रभार पाने वाले अपना सूचना तंत्र मजबूत करने का प्रयास नहीं करते ।
