भदोही में नसबंदी के बाद महिला की मौत पर परिजनों ने लगाया जाम
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भदोही। सरकार महिलाओं और आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का चाहे जो दावा करे। लेकिन इसकी धरातलीय हकीकत की तस्वीर कुछ और है। सरकारी अस्पतालों में स्थिति बद से बदतर है। यहां की बदइंतजामी जान पर बन आती है। महिलाओं से संबंधित स्वास्थ्य सुविधाओं की इंतजामी जग जाहिर है। इसका उदाहरण शनिवार को उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में देखने को मिला। जब नसबंदी आपरेशन के बाद फैले इंफेक्शन से जौनपुर की एक महिला की मौत हो गई। गुस्साए परिजनों ने डाक्टर के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत करने को लेकर जाम लगा दिया। पुलिस ने परिजनों की मांग आरोपी चिकित्सक के खिलाफ मामला पंजीकृत किया है। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के रामपुर थाने के राजापुर निवासी सुनीता यादव 32 पत्नी राजदेव ने 24 मार्च को परिवार नियोजन के लिए भदोही सामुदायिक अस्पताल में नसबंदी करायी थी। नसबंदी के खिलाफ जब महिला घर पहुंची तो उसकी तबियत खराब होने लगी। परिजन महिला को लेकर नसबंदी करने वाले डा. सुशील गुप्ता के पास लेकर आए। परिजनों का आरोप है कि चिकित्सक ने महिला का इलाज करने से मना कर दिया। महिला की जान बचाने के लिए परिजन उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां उसकी मौत हो गई। गुस्साए परिजनों ने सड़क पर जाम लगा दिया। जिससे आवागमन प्रभावित होने लगा। पीडि़त महिला के परिजन और संबंधी चिकित्सक की गिरफतारी और मुकदमा पंजीकृत करने पर अड गए। परिजनों का आरोप है कि नसबंदी के दौरान चिकित्सक की लापरवाही से महिला के आंत की नसकट गयी। जिससे उसकी मौत हो गई। भदोही कोतवाली पुलिस ने स्थिति को देखते हुए सामुदाकिय अस्पताल में तैनात चिकित्सक के खिलाफ की धारा 304 ए के तहत मामला पंजीकृत कर लिया गया है। पुलिस का दावा है कि मामले की जांच की जाएगी। दोषी होने पर चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई होगी।
