भदोहीः अस्पताल से बाहर की दवा लिखने पर बिफरे मांझी
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भदोही। प्रदेश के चिकित्सा एंव स्वास्थ्य राज्यमंत्री शंखलाल मांझी ने शुक्रवार को जिले के दौरे पर रहे। उन्होंने जिला अस्पताल महाराजा चेतसिंह का निरीक्षण किया। इसके बाद भदोही स्थित महाराजा बलवंत सिंह चिकित्साल में एक चिकित्सक की ओर से मरीजो को अस्पताल की दवा लिखने के बजाय बाहर की पर्ची लिखने पर खासी नाराजगी जतायी। उन्होंने आरोपी चिकित्सक से स्पष्टीकरण मांगा है। राज्य मंत्री ने कहा इस संबंध में शिकायत मिली है। इसके बाद उन्होंने सीएमओ और सीएमएस को साफ निर्देश दिया की सरकारी अस्पताल आने वाले मरीजों को बाहर से दवा न लिखी जाए। इसके अलावा मांझी ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान 17 पिछड़ी जातियों को अनसूचित जाति में शामिल करने को लेकर नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर 29 जुलाई को होने वाली महारैली के पर भी फोकस डाला। मंझी ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं। मरीजों को इलाज की सुविधाएं और दवाएं खैरात मिलनी चाहिए। अस्पताल के बाहर की दवा लिखना अपराध हैं। उन्होंने कहा जब अस्पतालों में पर्याप्त दवांए उपलब्ध हैं फिर बाहर से दवाएं क्यों लिखी जा रही है। पत्रकारों की ओर से निर्माणाधीन जिला अस्पताल में हुए घोटाले के बावत सवाल पूछने पर कहा कि इस पर कार्रवाई होगी। आरोपी कितना भी बड़ा क्यों न हो उसे बख्शा नहीं जाएगा। निर्माण में करोड़ो का घोटाला हुआ है। इसके अलावा मंत्री ने प्रदेश की 17 पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति का दर्जा दिलाने के बाबत कहा कि केंद्र की भाजपा की सरकार राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि इस सामाजिक हकदारी को लेकर 29 जुलाई को संबंधित जातियों के लोग नई दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेंगे। मांझी ने बताया कि समाजवादी सरकार इन जातियों को उनका अधिकार दिलाने के लिए कटिबद्ध है। मंत्री ने बताया कि प्रदेश की, गोंड, बेलदार, कुरैहा कहार कष्यप , केवट मल्लाह निषाद ,कोहार, और प्रजापति सहित सत्रह जाति को अनुसूचति जाति का लाभ दिलाने के लिए समाजवादी पार्टी संकल्पित है। उन्होंने बताया कि तत्कालीन मुलायाम सिंह यादच की सरकार ने उत्तर प्रदेश लोकसेवा अधिनियम 1994 की धारा 13 के अधीन शक्ति का प्रयोग कर इन जातियो ंको अनुसूचित जाति का दर्जा 2005 को जारी किया गया था। बाद में प्रदेश में बसपा की ओर से इलाहाबाद उच्च न्यायालय से स्थगन आदेश लिया गया। इसके बाद बसपा सरकार बनते ही 06 जून 2007 पहली कैबिनेट मीटिंग इस संशोधन को निरस्त केंद्र को भेज दिया गया। साल 2012 दोबारा आर्थिक सामाजिक और शैक्षिक रुप से पिडडे मछुवारों व दूसरी जातियों को अनूसूचित का लाभ दिलाने के 15 फरवरी 2013 केंद्र को संस्तुति भेजी गयी। जिसे आरजीआई की ओर से खारिज दिया गया। बाद में मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी सरकार की प्रतिबद्धता दुहराते हुए इसे लोकसभा में विश्वभर प्रसाद निषाद ने राज्य सभा में उठाया गया था। लेकिन बाद में 1 अप्रैल 2014 अनूसूचिता जनजाति बोर्ड एवं प्रशिाक्षण संस्थान ने इसे चैथी बार निरस्त कर दिया। केंद्रीय सरकार के सामाजिक अधिकारिता मंत्री थावरचंद्र गहलोत ने प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र के जबाब में 10 जून 2015 को इसे महारजिस्टार पंजीयन के यहां भेजा जहां इस प्रस्ताव को निरस्त कर दिया। यह मोदी सरकार का दिखावा है। सरकार सामाजिक न्याय पर दोमुंही नीति रखती है। मांझी ने कहा कि इसी अधिकार को लेकर प्रदेश भर की 17 जातियां 29 जुलाई जंतर मंतर पर धरना देंगी। जिले से 28 जुलााई को कही लोग रवाना होंगे।
