हज़रत अली की याद में निकला जुलुस
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जौनपुर। माहे रमजा़न की 21 वी तारीख मुसलमानों के खलीफा व शीयाओ के
पहले इमाम हज़रत अली की शाहदत के लिये जानी जाती है। शीराज़े हिन्द जौनपुर
में आज उनकी शाहदत की याद में विशाल मातमी निकाला गया। हज़रों की संख्या
में अज़ादारो ने नम आखो से अपने मौला को याद कर अलविदा किया।
शीराज़े हिन्द की सड़कों पर उतरे ये हज़ारो अज़दार हज़रत
अली की शाहदत को याद करते हुए नौहा व मातम कर रहे है। पैगम्बरे इस्लाम हज़रत
मोहम्मद साहब के दामाद व शीया मुसलमानों के पहले इमाम का जन्म खाना-ऐ काबा
में हुआ था। इस्लाम को पुरी दुनिया में फैलाने के लिये हज़रत अली वह उनके
परिवार वालों ने बड़ी कुर्बानी दी है। 18 रमज़ान की शाम से ही शहर पूरी
तरह गम मे डूब गया था क्यों आज ही के दिन भोर में नमाज़ पढते वक्त धोखे से
मस्जिद में इब्ने मुलज़िम ने मौला अली के सिर पर ज़हर से बुझी तलवार से वार
कर जख्मी कर दिया था और 21 वी रमज़ान को उनकी शाहदत हो गयी थी।
हजरत अली की शाहदत के गम में शही किले से विशाल
मातमी जुलूस निकाला गया। जुलूस में या अली मौला हैदर मौला करते हुये अज़ादार
अपने मौला का अलविदा करने निकले। मौला अली गरीबों के साथ-साथ पक्षीयों से
भी प्यार करते थे। यही वजह है कि उनको सभी मजहब के लोग मानते है

