गुरु में समाज सुधारक का गुण होता है
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हैदराबाद । आज जो मुझे जन सेवा संघ मे सम्मान मिला उससे मेरा मन गद गद हो गया और मै दो
शब्द लिख रहा हूँ आप सभी के बीच आप सभी के दुआ का कामना करता हूँ।
प्रसिद्ध वैज्ञानिक अलबर्ट आइंस्टीन का कथन है कि, एक वैज्ञानिक हैलोजन
बना सकता है। लाइट बना सकता है। लेकिन एक हैलोजन से दुसरा हैलोजन नहीं जला
सकता, एक लाइट से दुसरा लाइट नहीं जला सकता। लेकिन एक प्रेरक, एक पथ
प्रदर्शक( गुरु) में एक समसमाज सुधारक में वह गुण है कि एक दीपक से हजारों दीपक जला सकता है। वो है जन सेवा संघ हैदराबाद जो पथ प्रदर्शक होता है वह
तो पारस मणि के समान होता है, वह कामधेनु के समान, कौस्तुम मणि के समान
होहोता है, जो साधारण लोहा को छूकर वह सोना बना सकता है। वो है जन सेवा
संघ । साधारण इंसान को भी महान सकता है, जैसे चंद्र गुप्त मौर्य एक मात्र
भेडिया चराने वाले बालक थे। जंगल में भेड चराते चराते वह चाणक्य को मिल
गये। चाणक्य ने देखा बच्चा हाथ में धनुष बाण लेकर तीर चला रहा है । तीर
पेड पर तो लगता था पर निशाना से चुक जाता था। ये देखकर चाणक्य ने
कहाः-बेटा। निशाना तो तुम्हारा ठीक है, पर चलाने की विधि ठीक नहीं है । एक
बात ध्यान में रख, निशाना लगाते समय सांश नहीं लेना सांस को रोके रहना,
प्रत्यंचा को कान तक खींचना और फिर छोड़ना तब निशाना लगेगा। बच्चे ने ठीक
वैसा ही किया। निशाना सही जगह लगा, बच्चा आश्चर्य चकित हो उठा। और पुछा आप
कोई राजा तो नहीं । चाणक्य ने जवाब दिया।मैं राजा तो नहीं हुॅ।लेकिन राजा
बना सकता हूं। तुम राजा बनना चाहते हों।अगर हां तो मेरे पिछे चलना होगा और
अगर, मगर, किंतु परंतु नहीं करना होगा। हिंदु कुश पर्वत से लेकर बंगाल की
खाड़ी तक एक विशाल भारत का साम्राज्य बनाया, स्वर्णिस्वर्णिम इतिहास रच
दिया चंद्र गुप्त ने। एक चाणक्य कई चंद्रगुप्त बना सकता है, लेकिन कई
चंद्रगुप्त एक चाणक्य नहीं बना सकते। हमारे गौरवशाली जन सेवा संघ के
प्रेरणा स्रोत के जोत को समर्पित करता हूं राजू ओझा जन सेवा संघ के वरिष्ठ
पदाधिकारी के तरफ से

