गरीबी ने ले ली दो की जानें
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जौनपुर। खुटहन क्षेत्र के शेख अशरखपुर गांव के लखनापारा मजरा निवासी
गरीब दलित का किशोर पुत्र की इलाज के अभाव में हुई मौत के सदमे में उसके
बीमार बाप की भी दूसरे दिन मौत हो गई। 24 घंटे के भीतर हुई दो मौतों से
गांव में शोक की लहर दौड़ गई। इसी तरह से लगभग दो वर्ष पूर्व उसके एक और
जवान पुत्र की मौत हो चुकी है।
महेंद्र हरिजन वर्षों से टीबी रोग से पीड़ित चल रहा था। एक सप्ताह पूर्व उसका पुत्र सोनू (15) तेज बुखार से पीड़ित हो गया। उसका उपचार तुरंत न हो पाने के चलते उसे उल्टी भी शुरू हो गई। हालत अधिक खराब होने पर ग्रामीण चंदा इकट्ठा कर उपचार हेतु पीएचसी सोंधी ले गए। जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद रेफर कर दिया। पैसे के अभाव के चलते परिजन रविवार को उसे घर लेकर चले आए। जहां देर रात उसने दम तोड़ दिया। ग्रामीणों की मदद से सोमवार को सुतौली घाट पर उसकी अन्त्येष्टि कर दी गई।
इधर पुत्र के गम में मंगलवार को भोर में पिता महेंद्र ने भी दम तोड़ दिया। बताते हैं कि लगभग दो वर्ष पूर्व महेंद्र का 18 वर्षीय पुत्र कल्लू भी ऐसे ही इलाज के अभाव में असामयिक काल के गाल में समा गया था।
इधर गरीबी का अभिशाप झेल रही उसकी पत्नी शीला देवी, पुत्री शिल्पी (8), पुत्र ज्ञान चंद्र (5) व सुंदर (3) के सामने दो जून की रोटी मोहाल है। ऐसे में पति व पुत्र की अंतिम क्रियाएं वे किस प्रकार से कर पाएंगी। उसकी मदद को शासन-प्रशासन के साथ-साथ किसी भी स्वयंसेवी संस्था ने आगे आना गंवारा नहीं समझा।
महेंद्र हरिजन वर्षों से टीबी रोग से पीड़ित चल रहा था। एक सप्ताह पूर्व उसका पुत्र सोनू (15) तेज बुखार से पीड़ित हो गया। उसका उपचार तुरंत न हो पाने के चलते उसे उल्टी भी शुरू हो गई। हालत अधिक खराब होने पर ग्रामीण चंदा इकट्ठा कर उपचार हेतु पीएचसी सोंधी ले गए। जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद रेफर कर दिया। पैसे के अभाव के चलते परिजन रविवार को उसे घर लेकर चले आए। जहां देर रात उसने दम तोड़ दिया। ग्रामीणों की मदद से सोमवार को सुतौली घाट पर उसकी अन्त्येष्टि कर दी गई।
इधर पुत्र के गम में मंगलवार को भोर में पिता महेंद्र ने भी दम तोड़ दिया। बताते हैं कि लगभग दो वर्ष पूर्व महेंद्र का 18 वर्षीय पुत्र कल्लू भी ऐसे ही इलाज के अभाव में असामयिक काल के गाल में समा गया था।
इधर गरीबी का अभिशाप झेल रही उसकी पत्नी शीला देवी, पुत्री शिल्पी (8), पुत्र ज्ञान चंद्र (5) व सुंदर (3) के सामने दो जून की रोटी मोहाल है। ऐसे में पति व पुत्र की अंतिम क्रियाएं वे किस प्रकार से कर पाएंगी। उसकी मदद को शासन-प्रशासन के साथ-साथ किसी भी स्वयंसेवी संस्था ने आगे आना गंवारा नहीं समझा।
