चुनाव आयोग ने भी किया सिपाहियो के साथ भेदभाव ! चपरासी को 6 सौ रूपये, कास्टेबलो को मात्र 150 रूपये दिया भत्ता

जौनपुर। पंचायत चुनाव में मतदान कराने वाले अधिकारियो और कर्मचारियों के लिए चुनाव आयोग ने अपना खजाना खोल दिया है वही सुरक्षा ड्यूटी में लगाये पुलिस कास्टेबलो को भत्ता देने में कन्जूसी की सारी हदे पार कर दिया है। मतदान कराने के लिए लगाये कर्मचारियों को 1550 रूपये तक भुगतान दिया गया वही चिलचिलाती धुप में पूरे बुथ और मतदान कर्मचारियो की सुरक्षा करने वाले पुलिस कास्टेबलों मात्र 150 रूपये भत्ता मिला। इस दोहरे मापदण्ड के मामले पर पुलिस कास्टेबलो से बातचीत किया गया तो सभी ने कहा कि हम लोग अनुशासन में बधे हुए है इस लिए हम लोग कुछ बोल नही सकते लेकिन सिपाहियो के  चेहरो पर इसका दर्द साफ दिखाई पड़ा।
पूरे प्रदेश में पंचायत चुनाव चल रहा है। तीन चरण की वोटिगं समाप्त हो गया है चैथे चरण का मतदान आगामी 29 अक्टुबर को होगा। मतो की गणना एक नवम्बर को की जायेगी। पंचायत चुनाव में मतदान के लिए लगाये गये पीठासीन अधिकारी को 1550 रूपये प्रथम मतदान अधिकारी को 1150 रूपये द्वितीय मतदान अधिकारी को 900 रूपये और तृतीय को 600 रूपये भत्ता दिया गया। इसमें पीठासीन अधिकारी प्रथम और द्वितीय मतदान अधिकारी तृतीय श्रेणी के कर्मचारी लगाये जाते है और तृतीय मतदान कर्मी के रूप में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियो को लगाया जाता है। इस चुनाव को निष्पक्ष भयमुक्त वातावरण में सम्पन्न कराने के लिए लगाये गये पुलिस कास्टेबलो को मात्र डेढ़ सौ रूपये भत्ता दिया गया। सभी मतदान कर्मी बुथो के अंदर छाव में बैठकर अपना कामकाज निपटाते है उधर पुलिस कर्मी चिलचिलाती धुप में कंघे पर भारी वजन वाला राईफल लेकर ड्यूटी बजाता है बीच बीच अराजकतत्वो को खदेड़ने के लिए कई किलोमीटर तक दौड़ लगाता है। किसी किसी बुथ पर बुथ कैप्चरिगं जैसी घटनाओ को रोकने के लिए अपनी जान की बाजी तक लगा देते है। ऐसे में चुनाव आयोग का दोहरा मापदण्ड अपनाना क्या पुलिस कास्टेबलो के प्रति सौतेला व्यवहार करने की श्रेणी में नही आता।

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