भारतीय इंजीनियर विदेशों में जाकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे है : डा. प्रेमशंकर
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जौनपुर। वीर
बहादुर सिंह पूर्वान्चल विश्वविद्यालय का उन्नीसवां दीक्षान्त
समारोह 13 फरवरी को बसन्त पंचमी के शुभ अवसर पर आयोजित किया गया।
समारोह के अध्यक्ष प्रो. पीयूष रंजन अग्रवाल एवं मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध
वैज्ञानिक पद्मश्री डा. प्रेमशंकर गोयल , मानद अति विशिष्ट प्रोफेसर,
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) बेंगलुरू रहे। समारोह में 58
मेधावियों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।
इस
अवसर पर सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक पद्मश्री डा. प्रेमशंकर गोयल जी, मानद अति
विशिष्ट प्रोफेसर, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) बेंगलुरू ने कहा
कि हम प्रतिवर्ष 10 लाख नौकरी पाने वाले इंजीनियर पैदा करते है न की दक्ष
इंजीनियर। हम विद्यार्थियों को इंजीनियरिंग की परीक्षा पास करने हेतु तैयार
करते है, न कि इंजीनियरिंग उत्पाद हेतु।
उन्होंने
कहा कि जिस प्रकार से लार्ड मैकाले की व्यवस्था का उद्देश्य ब्रिटिश भारत
में सरकारी कार्य में अच्छे बाबू तैयार करना था, उसी प्रकार हमारी वर्तमान
इंजीनियरिंग शिक्षा बहुराष्ट्रीय कर्मियों के लिए अच्छे श्रमिक तैयार करती
है। भारतीय इंजीनियर विदेशों में जाकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे है।
उन्होंने कहा कि हमें इस बात पर विचार करने की आवश्यकता है कि हम विदेशों
में जाकर अच्छा काम और नाम दोनों करते है मगर अपने देश में हम सिर्फ हाशिए
पर ही दिखाई देते है। इसके लिए हमारे देश का वातावरण जिम्मेदार है या हमारी
मनोवृत्ति। इस बात पर चिंतन करना होगा।
प्रो.
गोयल का मानना हैं कि आज हम तेजी से बदलते हुए विश्व का हिस्सा हैं। दस
सालों में होने वाले विकास ने पूर्व के 100 सालों के विकास को पीछे छोड़
दिया है। जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में इंजीनियरिंग अद्भुत बदलाव ला रही
है। मोबाइल, जीपीएस, इंटरनेट, तकनीकी परिवर्तन के सूचक है। इंजीनियरिंग
व्यक्ति, समाज और मानवता के उन्नयन के लिए सूक्ष्म और वृहद दोनों स्तर पर
प्रयासरत है। हमारे जीवन का कोई भी क्षेत्र इंजीनियरिंग से अछूता नहीं है।
कुलाधिपति
के रूप में समारोह की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.
पीयूष रंजन अग्रवाल ने कहा कि समाज के निर्धन वर्ग के बच्चों को धन की
समस्या का सामना करना पड़ता है। हमें यह ध्यान देने की जरूरत है कि धन के
अभाव में कोई भी विद्यार्थी शिक्षा से वंचित न हो, इससे राष्ट्र का नुकसान
होगा। मेधावी युवाओं को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए और उन पर विशेष ध्यान
देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई भी संस्था तब तक अपनी जिम्मेदारियों को
पूरा करने का दावा नहीं कर सकती जब तक वह अपनी सामाजिक जिम्मेदारियां पूरी
नहीं करती। पाठ्यक्रमों में एक दूरवर्ती कार्यक्रम शामिल करना लाभकारी
होगा। इसमें समाज के उपेक्षित वर्गों और पड़ोसी समुदाय के साथ
विद्यार्थियों को आपसी संवाद द्वारा जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि
शिक्षकों का दायित्व है कि वे देश की उच्च परम्पराओं के अनुरूप कार्य करें।
सूचना प्रौद्योगिकी ने विश्व भर के लोगों को एक साथ जोड़ दिया है। शिक्षा
की पहुंच का विस्तार करने और इसकी गुणवत्ता सुधारने के लिए हमें ग्रामीण
क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए सूचना और संचार माध्यमों की शक्ति का प्रयोग
करना चाहिए। उन्होंने उपाधिधारकों के लिए कहा कि आज जीवन का एक नया अध्याय
प्रारम्भ कर रहे है, वास्तविक दुनिया में कदम रखते हुए सपनों को हकीकत में
बदलने की चेष्टा कर रहे है। आपने सतत प्रयास एवं अध्ययन से एक महत्वपूर्ण
मंजिल प्राप्त की है। दृढ़ निश्चय के साथ अपने परिवार समाज देश और मानवता
के लिए जीवन को सार्थक बनाने की एक नई पहल करने का प्रायोजन करें।
बतौर
कुलपति प्रो. डीडी दूबे ने कहा कि किसी भी शैक्षिक व्यवस्था में
विश्वविद्यालय के संचालन के लिये आवश्यक है कि इवजजवउ.नच ंचचतवंबी अर्थात्
आधारयुक्त नीति को अपनाते हुए कार्य संपादन किया जाय। भारत की परम्परागत
शिक्षण प्रणाली में मातृभाषा हिन्दी, संस्कृत, गणित के साथ अंग्रेजी एवं
वर्तमान में कम्प्यूटर शिक्षा को भी सामान्यतः समाहित किया गया है। इस
आधारभूत शिक्षा प्रणाली को जीवन्त रखते हुए शिक्षा प्रणाली को अधिक
सकारात्मक बनाने की आवश्यकता है, ताकि हमारे विद्यार्थी भूमण्डलीकरण के युग
में अपनी उŸारजीविता ;ैनतअपअंसद्ध बनाये रखने में सफल हो सकें। समस्त
शिक्षकों एवं विश्वविद्यालय को इस सम्बन्ध में आत्ममंथन करना होगा। सुदृढ़,
जवच.कवूउ ंचचतवंबी से शीर्ष नेतृत्व, समय-समय पर दिशा निर्देश देते हुए
नये मार्ग को प्रशस्त कर सकता है, ताकि परिवर्तन के प्रवाह के साथ-साथ
नवयुवकों को अग्रसर किया जा सके।
इस अवसर पर
उन्होंने कहा कि विष्वविद्यालय द्वारा सत्र 2015-16 में छ।।ब्.मूल्यांकन
के सम्बन्ध में स्व्प् की स्वीकृति के बाद सेल्फ स्टडी रिपोर्ट ;ैैत्द्ध
प्रेषित की जा चुकी है। पीयर टीम के आगमन हेतु तैयारी प्रगति पर है।
गुणवत्ता के लिए पारदर्षिता अनिवार्य तत्व है। इस हेतु सत्र 2014-15 में
विष्वविद्यालय से सम्बद्ध महाविद्यालयों का ।प्ैभ्म् पर पंजीकरण पूर्ण हो
चुका है। सत्र 2015-16 में पंजीकरण का कार्य प्रगति पर है। विष्वविद्यालय
द्वारा वर्ष 2015 में प्रदान की जाने वाली समस्त पी-एच0डी0 उपाधियों के
शोध-प्रबन्धों को विष्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा निर्धारित ’षोधगंगा’
कार्यक्रम पर पंजीकृत कराया गया है। विष्वविद्यालय की वेबसाईट को पुनः
रेखांकित किया जा रहा है। परीक्षा के सम्बन्ध में विष्वविद्यालय एवं समस्त
सम्बद्ध महाविद्यालयों से आॅनलाईन आवेदन पत्र लेने के उपरान्त आॅनलाईन
प्रवेषपत्र एवं इलेक्ट्रानिक मार्कषीट के वितरण की व्यवस्था पूर्ण कर ली
गयी है। विगत परीक्षाओं एवं पंजीकरण के समस्त आँकड़ों के लिये एक
डाटा-सेन्टर स्थापित करने की व्यवस्था की जा रही है। पुस्तकालय में उपलब्ध
पुस्तकों को डिजिटल करने हेतु कार्य निरन्तर प्रगति पर है। ई-पुस्तकालय की
स्थापना की गयी है। विष्वविद्यालय परिसर में वर्चुअल क्लासरूम स्थापित करने
हेतु एवं कान्फ्रेसिंग की सुविधा की प्रक्रिया प्रगति पर है।
विष्वविद्यालय में आप्टिकल फाइबर का लोकल नेटवर्क समस्त प्रयोगषालाओं,
कार्यालयों, कक्षाओं तथा छात्रावास के कमरों तक स्थापित है।
दीक्षान्त
समारोह में सत्र 2014-2015 में विभिन्न विषयों के 58 सर्वोच्च अंक धारक
विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। इसके साथ ही दस संकायो के
339 शोधार्थियों को पी-एचडी. उपाधि प्रदान की गयी। इसके पूर्व मुख्य अतिथि,
कुलपति द्वारा महात्मा गांधी एवं वीर बहादुर सिंह की प्रतिमा पर
पुष्पांजलि अर्पित की गयी। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में ओपेन थिएटर
मुक्तांगन एवं महिला छात्रावास के विस्तार यमनोत्री तथा ट्रांजिट हाॅस्टल-2
गंगोत्री का लोकार्पण मुख्य अतिथि ने किया।
इस
अवसर पर कुलसचिव डा. देवराज, वित्त अधिकारी एमके सिंह, कार्यपरिषद एवं
विद्यापरिषद सहित समस्त विधायी समितियों के सम्मानित सदस्यगण, पूर्व
राज्यपाल माता प्रसाद, पूर्व सांसद कमला प्रसाद सिंह, प्रबंधक अशोक सिंह,
पूर्व प्राचार्य डा. राधेश्याम सिंह, डा. देवेश उपाध्याय, डा. राजीव सिंह,
डा. सर्वानंद पाण्डेय, डा. दुर्गा प्रसाद अस्थाना, डा. दीदार सिंह यादव,
डा. राकेश सिंह, डा. एसपी ओझा, डा. विजय तिवारी, डा. अनुराग मिश्र, डा.
केडी सिंह, आनन्द मिश्र एडवोकेट, सुरेंद्र त्रिपाठी, संत लाल पाल, प्रो.
वीके सिंह, डा. मानस पाण्डेय, डा. अविनाश पाथर्डीकर, डा. मनोज मिश्र, डा.
दिग्विजय सिंह राठौर, डा. अवध बिहारी सिंह, डा. सुनील कुमार, डा. रूश्दा
आजमी सहित महाविद्यालयों के प्रबन्धक, महाविद्यालयों के प्राचार्य,
जनप्रतिनिधि, शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, विद्यार्थीगण एवं अभिभावक आदि
उपस्थित रहे।

