किशोरा अवस्था से स्वाधीनता आंदोलन में कूद गए थे भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु

जौनपुर। नगर के डीडीएस वेलफेयर सोसायटी के बैनर तले रविवार को संस्थान पर शहादत दिवस पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में उड़ान उम्मीदों की अभियान के तहत चलाये जा रहे नशा मुक्ति अभियान, साक्षरता अभियान समेत विभिन्न जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही पहल मंच की शुरुआत की गयी जिसमें युवाओं को जुड़ने की अपील की गयी। साथ ही संस्था के द्वारा धरनीधरपुर गांव में चलाये जा रहे कार्यक्रम के अंतर्गत नशा मुक्ति अभियान से प्रेरित होकर गांव की सात महिलाओं ने नशा करना छोड़ दिया। इसके अलावा संस्था प्रतिदिन उस गांव में जाकर बच्चों व महिलाओं को शिक्षित करने का कार्य कर रही है और संस्था एक अप्रैल को वहां के सभी बच्चों को सर्व शिक्षा अभियान के तहत सरकारी विद्यालयों में प्रवेश कराने का निश्चय किया है।
संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि किशोर न्यायालय मजिस्ट्रेट डा. विमला सिंह ने आजादी के कुछ पलों से युवाओं को जोड़ते हुए कहा कि 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी हुई थी। उन शहीदों ने हंसते हंसते अपने देश के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। वह चाहते थे कि हमारा देश अंग्रेजों से ही नहीं बल्कि साहूकारों, नौकरशाहों की गुलामी से आजाद हो। आज भी हम गुलामी से आजाद नहीं हो पाये है। उन्होंने कहा कि आज किसी भी कार्य को अंजाम देने के लिए युवा शार्टकट का प्रयोग न करें अगर उसे प्रतिक्षा करना हो रहा है तो वह प्रतिक्षा करें भ्रष्टाचार को बढ़ावा न दें और यदि इस तरह के कार्य कहीं पर हो रहे है तो उसके विरुद्ध आवाज उठायें। साथ ही अपने आप को भी बदलना शुरु कर दें। यदि आप में किसी प्रकार की कोई गलत सोच पनप रही हो तो उसे भयावह रुप लेने से पहले उसे वहीं समाप्त कर दें।
संस्थान की संचालिका आरती सिंह ने कहा कि शहीद भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु जब किशोर थे तभी से अपने देश की आजादी के लिए क्रांतिकारियों के साथ जुड़ गये। उन लोगों ने गरम दल के नेता चंद्रशेखर आजाद से जुड़कर देश को आजाद कराने के लिए अपनी जान तक न्यौछावर कर दी। उन्होंने बच्चों से शहीदों के जीवन के बारे में अध्ययन करने और उनके जीवन से प्रेरणा लेने की अपील की। साथ ही कहा कि आज स्मार्टफोन का जमाना है और हम सोशल साइट पर अधिक समय खर्च कर रहे है। हमे चाहिए कि हम साहित्य से भी जुड़े और देश को आजाद कराने वाले शहीदों के भी विचारों को जानें। कार्यक्रम का संचालन कर रहे शिक्षक गुरुपाल सिंह ने अतिथियों के प्रति आभार प्रकट किया। इस अवसर पर प्रशांत, सारथी, वंदना, विश्वप्रताप, मीनू, महरुबा, माधवी, नेहा, संदीप आदि उपस्थित रहे।

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