जौनपुर गौरव: देश ही नही विदेश में भी मिल चुका है डा0 ब्रजेश यदुवंशी को सम्मान
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ईद हमारी धरती है, होली है आकाश ।
हिन्दू मुस्लिम भाई भाई, अपना है विश्वास ।
इन लाईनों को लिखने वाले हिन्दी साहित्य के पुरोधा डाॅ0 ब्रजेश यदुवंशी मात्र 40 वर्ष की उम्र में वह मुकाम हासिल कर लिया, जिसको प्राप्त करने के लिए लोग पूरी उम्र गुजार दिया करते हैं। डाॅ0 ब्रजेश के अब तक दो दर्जन राष्ट्रीय और एक दर्जन अंतर राष्ट्रीय शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं और आधा दर्जन पुस्तके प्रकाशित हो चुकी हैं। जो देश के कई विश्वविद्यालय में पढ़ाया जा रहा है। वर्तमान समय में अंतर राष्ट्रीय शोध पत्रिका "अनुसंधान यात्रा"के सम्पादक हैं जिसका प्रकाशन 2011 से करते चले आ रहे हैं!यह शोध पत्रिका छात्र-छात्राओं के लिए काफी उपयोगी साबित हो रही है। इन्हे काशी हिन्दू विश्वविद्यालय द्वारा सन् 2009 में 'सारस्वत' सम्मान से नवाजा गया वहीं सन् 2013 में पूर्वाचंल विश्वविद्यालय द्वारा 'स्वामी विवेकानंद' पुरस्कार दिया गया। सन् 2014 में माॅरिशस के राष्ट्रपति के0 राजकेश्वर पुरयाग ने 'कर्मयोगी' सम्मान दिया। अरूणाचंल प्रदेश सरकार द्वारा भी इन्हें 'राष्ट्रीय एकीकरण' पुरस्कार मिल चुका है। डाॅ0 ब्रजेश को 2011 में महामहिम राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का मेहमान बनने का गौरव मिल चुका है। डाॅ0
ब्रजेश यदुवंशी सिरकोनी विकास खण्ड के सेहमलपुर गांव के रहने वाले हैं। उनकी प्राथमिक शिक्षा बाकराबाद प्राथमिक विद्यालय में हुई मीडिल की शिक्षा सेहमलपुर जूनियर हाई स्कूल से प्राप्त किया। कक्षा नौ से लेकर इण्टर तक की पढ़ाई बयालसी इण्टर कालेज जलालपुर से किया। उसके बाद बीए एमए की राजा कृष्णदत्त महाविद्यालय से किया। ब्रजेश ने हिन्दी से एम ए किया जिसमें उन्हे गोल्डमेडल मिला साथ में राजकालेज से पत्रकारिता से पीजी भी किया। देश की आजादी में हिन्दी सिनेमा पर शोध करके डाॅक्ट्रेट की उपाधि प्राप्त किया।
डाॅ0 ब्रजेश पढ़ाई के साथ साथ छात्र राजनीत में सक्रिय भूमिका निभाते रहे। उसी समय से राष्ट्रीय एकता पर्यावरण और भाषा आन्दोलन के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। वे पूर्वाचंल विश्वविद्यालय का पांच वर्षो तक एनएसएस के नोडल अधिकारी रहे इन्ही की देख रेख में 2011 में दिल्ली के 26 जनवरी के परेड में पूर्वाचंल विश्वविद्यालय के एनएसएस के छात्रो ने भाग लिया। इसी कार्यक्रम के तहत उन्हे और उनकी टीम को राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का मेहमान बनने का मौका मिला।
डाॅ0 ब्रजेश ने राष्ट्रीय एकता पर जो कार्य किया है उसके लिए तत्कालीन जिलाधिकारी जौनपुर गौरव दयाल द्वारा राष्ट्रीय एकता पुरस्कार, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय द्वारा सन् 2009 में 'सारस्वत' सम्मान, वही सन् 2013 में पूर्वाचंल विश्वविद्यालय द्वारा 'स्वामी विवेकानंद' पुरस्कार दिया गया। सन् 2014 में माॅरिशस के राष्ट्रपति ने 'कर्मयोगी' सम्मान दिया। अरूणाचंल प्रदेश सरकार द्वारा राष्ट्रीय एकीकरण पुरस्कार दिया गया है।
डाॅ0 ब्रजेश द्वारा प्रकाशित की जा रही अंतर राष्ट्रीय शोध पत्रिका 'अनुसंधान यात्रा' से देश के कई माने जाने विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर जुड़े हुए हैं। जिससे शोध करने वाले छात्र-छात्राओ को काफी लाभ हो रहा है।
डाॅ0 यदुवंशी की 'माॅरिशस के प्रख्यात साहित्यकार प्रहलाद रामशरण', 'राष्टीय चेतना के गीतकार कवि प्रदीप' और 'स्वतंत्रता आंदोलन में हिन्दी फिल्मो की भूमिका' पर लिखी गयी किताब काफी लोक प्रियता हासिल कर चुकी है। वर्तमान समय में 'परमवीर चक्र विजेताओं और जौनपुर के इतिहास पर किताब लिख रहे हैं।
पढ़ाई लिखाई के साथ साथ पर्यावरण के क्षेत्र में काम करते हैं, वे हर वर्ष भारत- पाक सीमा सुचेतगढ़ जाकर सभी जवानो को नीम का पौधा भेंट करते हैं और खुद रोपड़ करते हैं।साथ में सीमा पर डटे जवानो का हौसला आफजाई भी करते हैं।सम्प्रति आप देश-विदेश के कई विश्वविद्यालयों में हिन्दी तथा भोजपुरी के अतिथि प्रोफेसर भी हैं।





