जौनपुर गौरव : मुस्लिम महिलाओ के लिए मिशाल है हुसैना बेगम
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जौनपुर। चार वर्ष पूर्व मौत को मात देने वाली लेफ्टिनेंट हुसैना बेगम मुस्लिम महिलाओं के लिए एक मिशाल बन गयी है। ये इस्लामिक मान्यताओ का निर्वाह करते हुए बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से परास्नातक करने बाद राजकीय बालिका इण्टर कालेज में शिक्षक बनी। खास बात यह रही कि खुद पढ़ाई करने के साथ साथ अन्य मुस्लिम को पढ़ाई की प्रति पे्ररेरित करके उन्हे घर की चाहरदिवारी से बाहर निकाली। आज भी वे अपने धर्म की लड़कियों को पढ़ाई लिखाई के लिए प्ररेरित करती रहती है और गरीब लड़कियो को तालिम लेने में हर सम्भव मदद भी करती है।
हुसैना बेगम नगर के बलुआघाट मोहल्ले की निवासी है। उनकी प्राथमिक से लेकर स्नातकोत्तर तक की शिक्षा वाराणसी से पूरी हुई। पढ़ाई पूरी करते ही उनकी नियुक्ति राजकीय बालिका इण्टर कालेज मिर्जापुर में 1984 में हो गयी एक वर्ष बाद उनका तबादला वाराणसी जीजीआईसी में हो गया। उसके बाद 1990 में जौनपुर जीजीआईसी में ट्रांसफर हो गया। हुसैना बेगम पढ़ाई के साथ साथ खेल कूद में भागीदारी करती रही जिसके कारण 1992 उनका सलेक्सन 30 यूपी गल्र्स बटालियन में लेफ्टिनेंट पद हो गया। उसके बाद से पूरी सर्विस काल में वे इसी पद रही। 30 जून 2012 को उनका प्रमोशन होकर अपने कालेज का प्रिंसपल पद का चार्ज लेने जा रही थी कि र्दुभाग्य से उनको तगड़ा ब्रेन हैमरेज हो गया। डाक्टर के अनुसार इस तरह के हैमरेज का शिकार होने वाला आज तक कोई मरीज नही बचा लेकिन ये मौत को मात देते हुए एक बार फिर से अपने पैरो पर खड़ी हो गयी। विमारी के दरम्यान ही वे रिटायर्ड हो गयी। मौजूदा समय में वे मुस्लिम महिलाओ और लड़कियों को शिक्षा के प्रति जागरूग करने में लगी हुई है। उनका मानना है कि जब तक हमारे समाज की लड़कियां शिक्षित नही होगी तब तक उनका शोषण नही रूक सकता है न ही गरीबी समाप्त होने वाली है। वे कहती है हमारे धर्म की महिलाएं इस्लामिक मान्यताओं के दायरे में रहकर पढ़ाई लिखाई करे साथ में खेलकूद में भी आगे आये जिससे हमारा समाज तरक्की करे और देश आगे बढ़े।
सामाजिक कार्यो में बढ़ चढकर हिस्सा लेने के मामले में लायंस क्लब सूरज लायंस क्लब ने सम्मान दिया और 26 जनवरी को पुलिस लाईन में आयोति कार्यक्रम उन्हे सम्मान मिल चुका है।
हुसैना बेगम नगर के बलुआघाट मोहल्ले की निवासी है। उनकी प्राथमिक से लेकर स्नातकोत्तर तक की शिक्षा वाराणसी से पूरी हुई। पढ़ाई पूरी करते ही उनकी नियुक्ति राजकीय बालिका इण्टर कालेज मिर्जापुर में 1984 में हो गयी एक वर्ष बाद उनका तबादला वाराणसी जीजीआईसी में हो गया। उसके बाद 1990 में जौनपुर जीजीआईसी में ट्रांसफर हो गया। हुसैना बेगम पढ़ाई के साथ साथ खेल कूद में भागीदारी करती रही जिसके कारण 1992 उनका सलेक्सन 30 यूपी गल्र्स बटालियन में लेफ्टिनेंट पद हो गया। उसके बाद से पूरी सर्विस काल में वे इसी पद रही। 30 जून 2012 को उनका प्रमोशन होकर अपने कालेज का प्रिंसपल पद का चार्ज लेने जा रही थी कि र्दुभाग्य से उनको तगड़ा ब्रेन हैमरेज हो गया। डाक्टर के अनुसार इस तरह के हैमरेज का शिकार होने वाला आज तक कोई मरीज नही बचा लेकिन ये मौत को मात देते हुए एक बार फिर से अपने पैरो पर खड़ी हो गयी। विमारी के दरम्यान ही वे रिटायर्ड हो गयी। मौजूदा समय में वे मुस्लिम महिलाओ और लड़कियों को शिक्षा के प्रति जागरूग करने में लगी हुई है। उनका मानना है कि जब तक हमारे समाज की लड़कियां शिक्षित नही होगी तब तक उनका शोषण नही रूक सकता है न ही गरीबी समाप्त होने वाली है। वे कहती है हमारे धर्म की महिलाएं इस्लामिक मान्यताओं के दायरे में रहकर पढ़ाई लिखाई करे साथ में खेलकूद में भी आगे आये जिससे हमारा समाज तरक्की करे और देश आगे बढ़े।
सामाजिक कार्यो में बढ़ चढकर हिस्सा लेने के मामले में लायंस क्लब सूरज लायंस क्लब ने सम्मान दिया और 26 जनवरी को पुलिस लाईन में आयोति कार्यक्रम उन्हे सम्मान मिल चुका है।


