.जहां मौत के दरवाजे से हर रोज गुजरती हैं हजारों जिंदगियां



जौनपुर। नगर में एक ऐसा मोहल्ला है जहां पर मौत की एक इमारत खड़ी है जो खण्डहर, जर्जर अवस्था में है। यह कब गिर जाय, निश्चित नहीं है। अब तक कई बार इसके बारजे गिर चुके हैं जिससे एकाध लोगों की जानें जा चुकी हैं और न जाने कितने लोग घायल हो चुके हैं। कई बार तो ऐसा हुआ कि इसका बारजा गिरा लेकिन संयोगवश नीचे कोई नहीं था। यह मोहल्ला नगर के ओलन्दगंज-कचहरी मार्ग पर स्थित है जिसका नाम नखास है। मानसून ने जिले में दस्तक दी तो झमाझम बारिश शुरु हो गयी। ऐसे में जहां सड़कों पर नालियों की पानी बहने लगीं, वहीं नखास के पुराने राजभवन का आगे का हिस्सा दो पूर्व की रात रात में अचानक भरभराकर गिर गया। यह कोई नयी बात नहीं है, क्योंकि काफी जर्जर हो चुके इस भवन का कुछ न कुछ हिस्सा आये दिन गिरता रहता है। भवन में रहने वाले दर्जनों परिवार अपनी जान हथेली पर रखकर निवास करता है। शायद इसलिये कि इस भवन का किराया न के बराबर है और शहर के हृदय में इतने सस्ते में कोई न किराये का मकान मिलेगा और न ही दुकान। साथ ही इस भवन के बाहर दर्जनों परिवार ऐसे हैं जो गरीब हैं और वहीं पर बांस चीरकर उससे सम्बन्धित सामग्री बनाने का कार्य करते हैं। किसी तरह इनका जीवन चलता है लेकिन यह भी हमेशा सतर्क रहते हैं कि कहीं भवन का कोई हिस्सा उनके ऊपर न गिर जाय। गर्मी के दिनों में ये लोग इसी भवन के बाहर रात में सोते हैं। मानसून की दस्तक से इधर बारिश होने की वजह से गर्मी से थोड़ी राहत मिली तो ये लोग घर में सोने लगे, अन्यथा मंगलवार इनके लिये अमंगल ही होता। हर तरफ सिर्फ चीखने-पुकारने व रोने-पीटने की आवाजें ही आती, क्योंकि मंगलवार की रात में हुई तेज बारिश से इस भवन का बारजा अचानक भरभराकर नीचे गिर गया जिससे कोई जनहानि इसलिए नहीं हुई कि रात के सन्नाटे और झमाझम हो रही बारिश में वहां कोई नहीं था लेकिन अंदर निवास कर रहा दर्जनों परिवार तो एक बार फिर सहम सा गया। लोग ईश्वर से प्रार्थना करने लगे कि भगवान आज की रात सकुशल गुजार दो। फिलहाल रात गुजरी और किसी तरह सुबह हुआ तो स्थानीय लोग राजभवन का बारजा गिरा देख ईश्वर को धन्यवाद देने लगे। इतना ही नहीं, शुक्रवार को दिन में भी उक्त जर्जर भवन का कुछ हिस्सा अचानक भरभराकर गिरने लगा जिसके चलते वहां काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल रहा। मोहल्लेवासी कई बार जिला प्रशासन से मौत की इमारत को गिराने के लिये कई बार मांग किये जिस पर प्रशासनिक अधिकारी आकर जायजा भी कराया लेकिन मामला फिर ठण्डे बस्ते में चला गया। आखिर जिला प्रशासन इसकी सुधि कब लेगा? आखिर कब तक लोग मौत के साये में जीते रहेंगे? क्या इसका कोई समाधान नहीं है? क्या प्रशासन को किसी बड़े दुर्घटना का इंतजार है? लोग हमेशा यही कहते रहते हैं कि यहां तो मौत का दरवाजा है जहां हर रोज हजारों जिंदगियां गुजरती रहती हैं।

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