किसानों की फसलों पर नील गायों का आतंक का साया
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जलालपुर (जौनपुर )किसानों की फसलों पर नील गायों के आतंक का साया छाया हुआ है। जहाँ एक तरफ दलहनी फसलों तथा सब्जियों के दामों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। वही दूसरी तरफ इसे लेकर राजनीत हो रही है और एक दूसरे के माथे पर महंगाई का ठीकरा फोड़ने में जुटे हुए हैं। जबकि देखा जाए तो देश के अंदर महंगाई का प्रमुख कारण नीलगाय भी है। जो एक ही रात में किसानों के अरमानों पर पानी फेर देते है और किसानों की सारी लागत मेहनत मजदूरी सहित डूब जाती है ।जिससे किसानों के सपने क्षण भर में चकनाचूर होकर धराशाही हो जाते है। और किसान बदहाल हो जाता है ।इनके डर से अब तो खेती करने में भी किसान कतराने लगे है।और अपने खेतों को परती छोड़ दे रहे हैं। अगर सरकार किसानों की इस समस्या को महंगाई से जोड़ कर देखे तो नीलगाय महंगाई की वृद्धि मे प्रमुख कारण है। यदि इस समस्या का समाधान कर दिया जाए तो लाखो हेक्टेयर जमीन जो इन के डर से खाली पड़ी है ।उस पर खेती होने लगेगी। और किसान फिर से खुशहाल हो जाएगा। और फसल की पैदावार बढ़ जाएगी तथा निरंकुश महंगाई पर एक हद तक काबू पाया जा सकता है। नील गायों का फसलों पर आतंक की समस्या किसी एक क्षेत्र जिला विशेष की नहीं है बल्कि कई प्रदेश इन की चपेट में है। वन्य पशु अधिनियम के अंतर्गत आच्छादित होने के कारण किसान चाह कर भी कुछ नहीं कर पाता है और अपनी बेबसी पर आंसू बहाने के लिए मजबूर हो जाता है। एक समय था जब देश में जय जवान जय किसान का नारा लगाया जाता था। अब वह समय आ गया है जय जवान जय पिसान ।अब तो अन्नदाता कहे जाने वाला किसान पिसान बनकर रह गया है। अब तो प्राकृतिक आपदाओं के साथ-साथ इनकी भी मार सहनी पड़ रही है। किसान किसी तरह से बैंकों से कृषि पर ऋण लेकर कड़ी मेहनत करके फसल तैयार करता है और सोचता है अब अच्छे दिन आने वाले है परंतु वही नील गायों द्वारा एक ही रात में उसकी फसल चौपट कर दी जाती है और उसके दिल के अरमां आंसुओं में बदल जाते है यदि समय रहते सरकार द्वारा इन नील गायों पर अंकुश नहीं लगाया गया तो किसान किसानी छोड़ बदहाल हो जाएंगे ।और महगाई बेलगाम होकर बढ़ती जाएगी।

