पुलिस की चूक से इटहरा में हुआ था बवाल
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जौनपुर। जिले के मुंगराबादशाहपुर में बीते १५ जून की आधी रात को इटहरा गांव में बोलरो से हुई भीषण दुर्घटना के पश्चात १६ जून को गांव मे फैला मातमी माहौल आखिर क्यो और कैसे उपद्रव में तब्दील हो गया यह अबूझ पहेली बन गया है जिसके रहस्य पर पड़ा पर्दा हटाने के लिए पुलिस प्रशासन को मामले की तह तक जाना होगा । यदि इमानदारी से जांच करायी जाय तो कई लोग इसके जिम्मेदार होगे । एक अदद लाश को लेकर पुलिस एवं जनता दोनों आमने सामने हो गये । परिणाम स्वरूप संघर्ष में प्रशासन के वाहन जहां क्षतिग्रस्त हुए वहीं पुलिस एवं पब्लिक दोनों ओर से लोग घायल हुए थे । यदि इस संघर्ष पर एक नजर डाली जाय तो पूरे मामले में पुलिसिया कार्यवाही पर ही संदेह की उंगली उठने लगती है । गांव के लोग इस भीषण हादसे से पूरी तरह सकते मे आ चुके थे । प्रत्यक्षदर्शियो के अनुसार दुर्घटना की जानकारी मिलने पर घटनास्थल पर एक चार पहिया वाहन एवं क्रेन के साथ पहुंची पुलिस घायलों को अस्पताल भेजने की बजाय बोलेरो पर सवार लोगो को आगे के लिए रवाना करने के साथ ही दुर्घटना मे क्षतिग्रस्त बोलरो को ही पहले हटवाने का प्रयास किया । जिस पर गांव के लोगो द्वारा आपत्ति किये जाने पर पुलिस घटनास्थल से बगैर पंचनामा किये ही दो लाशें उठा लायी । जो गांव के लोगो को सोचने पर मजबूर करने के साथ ही ग्रामीणों में संदेह भी पैदा कर दिया कि आखिर पुलिस बिना पंचनामा के ही लाशंे क्यो हटा रही है । जब तक पुलिस तीसरी लाश अपने कब्जे में लेती गांव के लोग संगठित हो मुवावजे के साथ ही घटनास्थल पर डीएम व एस पी को बुलाने की मांग करने लगे । लोगों की माने तो यहां भी पुलिस से चूक हो गयी जिसका परिणाम प्रशासन से लेकर आम लोगो को भुगतना पड़ा । अधिकारी ग्रामीणो को समझा रहे थे लेकिन लाश को अपने कब्जे मे लेने को ब्यग्र हो रही पुलिस की एक चूक ने ही मातमी एवं गमगीन माहौल को उपद्रव मे तब्दील कर दिया । प्रत्यक्षदर्शियो के अनुसार जब गांव वाले तथा परिजन लिखित आश्वासन मिलने के बाद लाश सौपने को तैयार थे तो पुलिस को शक्ति बरतते हुए लाश को अपने कब्जे मे नहीं लेना चाहिए था । पुलिस ने बिरोध करने वालांे पर पहले हाथ छोड़ा फिर लाठिया चटकाने लगी जिसके कारण ग्रामीणो का धैर्य टूट गया तथा मातम एवं गम का माहौल बदल कर संघर्ष मे तब्दील हो गया । पुलिस के लाठी भांजने का जबाब वे ईंट पत्थर से देने लगे । दोनो ओर से गुरिल्ला युद्ध की स्थिति बन गयी , जब कि हाइवे पर घण्टो जाम लगा रहा । स्थिति को गम्भीरता से लेतेहुए भारी पुलिस बल के साथ आये पुलिस अधीक्षक एवं अपर जिलाधिकारी ने स्थिति को काबू में करने के पश्चात लाश को अपने कब्जे में लेकर परिक्षण हेतु भेजवाया । बदले की भावना से ग्रसित पुलिस अब प्रदर्शनकारियो के बिरूद्ध मुकदमा पंजीकृत कर धाराये थोप जेल भेजने लगी है । पुलिस यदि संवेदना में साझा होकर अपने दायित्वो का निर्वहन किया होता तो ऐसी घटना के घटित होने का सवाल ही नही होता , न तो उपद्रव होता ,न फैलती अराजकता और न ही जलती मोटर साइकिल ।

