शोधार्थी को घिसी-पिटी अवधारणा से बचें: निम्से
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जौनपुर। पूर्वान्चल विश्वविद्यालय परिसर केदकांफ्रेंस हाल में गुरूवार को शोध प्राविधि एवं कम्प्यूटर एप्लीकेशन विषयक कार्यशाला के समानान्तर तकनीकी सत्रो में विद्वान विशय विषेशज्ञो द्वारा शेोधार्थियों को महत्वपूर्ण जानकारी दी गयी। लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 एसबी निम्से ने कहा कि शोध कार्य करते समय आधार भूत ज्ञान के स्रोत पर इमारत खड़ी करने की अवधारणा का ध्यान रखकर कार्ययोजना तैयार करने की जरूरत है। शोधार्थी को घिसी-पिटी अवधारणा से बचते हुए उत्कृष्ट शोध के लिए सक्रिय होना चााहिए। उन्होंने महान भारतीय गणितज्ञों के अनुसंधानो की चर्चा करते हुए विद्यार्थियों को उनसे प्रेरणा लेने कीइसलाह दी। उन्होने षोध विषेशज्ञों से वर्तमान में ज्वलन्त विशयों पर षोध करने की जरूरत पर बल दिया। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो0 पीयूश रंजन अग्रवाल ने कहा कि देश में पर्याप्त इंजीनियर हैं लेकिन तकनीशियन कम हो रहे है। षोधकर्ता को वर्तमान से अवगत होते हुए भविश्यगत समस्याओं के निदान के लिए सार्थक शोध करना होगा। उन्होंने कहा कि इस कार्यषाला की माध्यम से षोधार्थियों की सोच को व्यापक बनाने की कोषिष की गयी है। काशी विद्यापीठ के प्रो0 राममोहन पाठक ने षोध प्राविधि, मौलिक लेखन एवं स्रोत विशय विद्वानो के संदर्भ में विस्तार से चर्चा की। कार्यशाला में विश्वविद्यालय के एमबीइ, एचआरडी, एमबीए, कामर्स ,मनोविज्ञान ,अर्थशास्त्र एवं समाज शास्त्र के पंजी.त शोधार्थी का अन्तिम दिन था। विवेकानन्द केन्द्रीय पुस्तकालय में बी0एच0यू0 के डिप्टी लाईब्रेरियन डा0 संजीव सर्राफ ने षोध हेतु पुस्तकों की महत्ता, एवं उनकी उपयोगिता पर चर्चा की। मानद पुस्तकालयाध्यक्ष डा0 मानस पाण्डेय ने जर्नल, टेक्स्ट बुक्स, रिफरेंसबुक्स तथा इडिटेड किताबो के जरिये षोध हेतु विद्यार्थियों को व्याख्यान दिया। उप कुल सचिव संजीव सिंह, डा0 रामनारायण, डा0 एस0पी0 तिवारी डा0 राजेश शर्मा, डा0 मनोज मिश्र, डा0 रषिकेष, डा0 दिग्विजय सिंह राठौर, डा0 अवध बिहारी सिंह, डा. सुनील कुमार, ऋशि श्रीवास्तव, डा आलोक दास, डा0 सुषील सिंह, डा0 आलोक सिंह, डाॅ. केएस तोमर आदि मौजूद रहे।
फोटो 04- पूविवि में सेमिनार को सम्बोधित करते कुलपति प्रो0 एसबी निम्से ।

