प्लास्टिक उद्योग बन्द करवाने की मांग

जौनपुर। प्लास्टिक एवं फाइवर उद्योग के चलते मुसहरों और कुम्भकारों के समक्ष रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो गयी है। पहले शादी विवाह व अन्य समारोहों मेें भोजन एव ंनाश्ते के वक्त पुरवा और कसोरा का उपयोग किया जाता था जिसका निर्माण कुम्भकार करते थे और पत्तल का निर्माण मुसहर आदिवासी जाति के लोग करते थे और लगन के दिनों में उपरोक्त सामानों की बिक्री से ये अपने परिवार का खर्च निकाल लेते थे परन्तु अब विवाह व अन्य समारोहों में पुरवा, पत्तल कसोरे का प्रचलन बन्द होता जा रहा है और इनके स्थान पर प्लास्टिक और फाइवर की बनी प्लेटे, भोजन में मशीन से बनाये गये फाइवर पत्तल एवं  प्लास्टिक का गिलास  धड़ल्ले से उपयोग हो रहा है। समारोहों में पुरवा के उपयोग से तेज हवा चलने के बाद भी इधर-उधर उड़ने का खतरा नहीं होता था किन्तु प्लास्टिक और फाइवर से बने दोनो पत्तल व गिलासों एवं अन्य सामानों में यह बात नहीं है। जहां बफर सिस्टम के माध्यम से आगन्तुकों को भोजन कराया जाता है वहां तो साफ-सफाई राम भरोसे ही रहती है। पुरवा एवं पत्तल के प्रयोग में साफ-सफाई बनी रहती थी। प्लास्टिक से प्रदूशण भी बढ़ता है। कुम्भकारों एवं मुसहर जाति के लोगों ने सरकार से प्लास्टिक उद्योग को बढ़ावा देने की बजाय पर्यावरण की दृष्टिगत उसे बन्द कराये जाने की मांग की है ।

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