देश के खिलाफ नारेबाजी करने वालो पर दर्ज हो राष्ट्रद्रोह का मुकदमा : अम्बुजानन्द
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जौनपुर । इस समय
हमारे देश में राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में लिप्त लोग दूसरे देशों की
जय जयकार कर रहे हैं। इतना ही नहीं, भारत में रहकर भारत के खिलाफ नारे
लग रहे हैं। ऐसे लोगों को चिंहित कर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा दर्ज कर जेल
भेजना चाहिये। इसके अलावा उन लोगों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगना चाहिये जो
बांग्लादेश, ईराक, ईरान जैसे देशों से आकर यहां की नागरिकता प्राप्त कर
लिये हैं। उक्त बातें शिव सेवा संस्थानम् के संस्थापक स्वामी अम्बुजानन्द
जी महाराज ने रविवार को सरस्वती बाल मन्दिर शास्त्रीनगर में पत्रकारों से
वार्ता करते हुये कही।
उन्होंने
कहा कि गोरक्षा कानून को और सख्त किया जाय, ताकि पशु तस्करों सहित इस
मामले में लिप्त लोगों पर शिकंजा कस सके। वर्तमान के बिगड़ते मानसून को
देखते हुये अधिक से अधिक पेड़ लगाये जायं एवं उन्हें संरक्षित किये जायं।
साथ ही नदियों, तालाबों, नहरों के किनारों की सफाई हो जिससे ये जलाशय
सुन्दर लगे। स्वामी जी ने कहा कि हिन्दू धर्मस्थलों पर हुये अतिक्रमण को
तत्काल हटाये जायं। इसके साथ ही इनकी सुरक्षा को देखते हुये इन्हें
संरक्षित किया जाय, ताकि इस पर अतिक्रमण न हो सके।
अन्त
में उन्होंने कहा कि संस्थानम् का मुख्य उद्देश्य हिन्दू धर्म एवं भारतीय
संस्कृति की रक्षा करना एवं उसका अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करना है। इस
अवसर पर अध्यक्ष विमल सिंह, मनीष सेठ, पवन शर्मा, आलोक उपाध्याय, बसंत
शुक्ला, अमित शुक्ला, अमर जौहरी, विजय चैरसिया, रामचन्द्र बिन्द, किशन
बिन्द, प्रिंस सिंह, विशाल सिंह, सौरभ यादव, विनोद यादव, अजय गुप्ता,
अम्बुज पाण्डेय, सूरज सोनी, मनोज अग्रहरि, हरेराम केसरवानी सहित अन्य लोग
उपस्थित रहे।
प्रमुख बिन्दुः-
1- बांग्लादेश, ईराकी, ईरानी जो भारत के विभिन्न कोनों में रहकर नागरिकता ले लिये हैं, वह कैसे एवं क्यों हुआ?
2- राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के साथ देश विरोधी नारों का प्रचलन निरन्तर बढ़ रहा है, ऐसा क्यों?
3- गोरक्षा कानून को और सख्त किया जाय एवं पशु तस्करों सहित इस मामले में लिप्त सभी लोगों को पकड़कर रासुका लगाया जाय।
4-
आज के बिगड़ते मानसून को देखते हुये पर्यावरण पर ध्यान दिया जाय। साथ ही
पेड़-पौधों को संरक्षित करने के अलावा जलाशयों को सूखने न दिया जाय।
5- हिन्दू धर्म स्थलों पर किये जा रहे अतिक्रमण हटाये जायं एवं सुरक्षा के मद्देनजर इन स्थलों को संरक्षित किया जाय।

