सीएम के गुडवर्क को बैडवर्क करने में जुटे है मंत्री नेता और पुलिस के अधिकारी

जौनपुर। लोकसभा चुनाव 2014 के बाद से यूपी के सीएम अखिलेश यादव जौनपुर को मेडिकल कालेज का सौगात देने के बाद नगर में विकास की गंगा बहाना शुरू कर दिया है। यहा की सकरी सड़को को चौड़ीकरण कराकर जनता को जाम के झाम से निजात दिलाने का काम तेजी से हो रहा है। साथ में कई चौराहो को सुन्दरीकरण कराया गया। इस अलावा सुन्दर आर्कषक लाईटे शिराज ए हिन्द सरजमी की सुन्दरता को चार चांद लगा रही है। गोमती नदी के किनारे सद्भावना पुल से शाहीपुल तक पुथपाथ बनाने का काम चल रहा है। सपा सरकार के मंत्री नेता और उनके नाते रिश्तेदार और कुछ पुलिस अफसर अखिलेश के सारे गुडवर्क को अपने निजी लाभ के लिए बैडवर्क में तब्दील कर दे रहे है। इन नेताओ के  कारस्तानी के चलते जनता सारे विकास कार्यो का श्रेय किसी मंत्री नेता को नही बल्की जिलाधिकारी को दे रही है।

लोकसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पूरे यूपी में विकास की गंगा बहाने का प्रयास शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में ऐतिहासिक नगरी जौनपुर को सुन्दर और स्वच्छ बनाने के लिए भरपूर पैसा दे रहे है। इस पैसे नगर सकरी सड़को चौड़ा किया जा रहा है चैराहे को सुन्दर बनाया गया। मेडिकल कालेज की अधारशीला रखी जिसका जल्द ही उद्घाटन भी होने की उम्मीद की जा रही है। अपने जिले का विकास देखकर यहा की जनता का विश्वास समाजवादी की तरफ बढ़ने लगा थी। लेकिन मंत्री विधायको और नेताओ के चलते जनता का बार फिर से सपा से मोहभंग होने लगा है।
सपा की लुटिया डुबोने में यहां पर तैनात कई  पुलिस अधिकारी भी है। ये लोग अपने अपने आकाओ को खुश करने के लिए एक पक्षिय कार्यवाही कर रहे है। जिसके कारण बेगुनाह जेल भेजे जा रहे है और अपराधी खुलेआम घुम रहे है। इसकी बानगी आप बीते सोमवार को लाईनबाजार थाना क्षेत्र के रसैना गांव के पास जाम फसे कैबिनेट मंत्री के पुत्र को निजात दिलाने के लिए उनका सरकारी गनर जनता पर जमकर लाठियां तोड़ी। उसके जद्द में आये ईटीवी के पत्रकार ब्रजराज चौरसिया को गनर लाठियों से पीटा विरोध करने पर उनके सीने पर कारबाईन सटा दिया। इस जानकारी होते ही इलेक्ट्रानिक मीडिया संघ समेत कई पत्रकार संठनो आक्रोश व्यक्ति करते हुए एसपी से पूरे मामले जांच कराकर आरोपी सिपाही और मंत्री पुत्र के खिलाफ कार्यवाही करने को कहा। एसपी ने इस मामले की जांच अपर पुलिस अधीक्षक रामजी सिंह यादव के नेतृत्व सीओ सिटी रामप्रसाद सिंह यादव को सौपी और पीड़ित पत्रकार द्वारा लाईनबाजार थाने में मुकदमा लिखने के लिए प्रार्थना पत्र दिया।
कैबिनेट मंत्री से मामला जुड़ा होने के कारण इस मामले को पुलिस अफसरो ने तीन दिन तक दबाये रखा। जब इलेक्ट्रानिक मीडिया संघ ने एसपी पर दबाव बनान शुरू किया  तो पहले थानाध्यक्ष विश्वनाथ यादव ने अपनी जांच में पूरे मामले को फर्जी करार दे दिया। दूसरे दिन सीओ सिटी द्वारा की गयी जांच में भी मंत्री के गनर को क्लीन चीट दे  दिया।
यह मामला पत्रकारो के संज्ञान में आते ही पूरा पत्रकार जगत आक्राशित हो गया। एसपी ने मौके की नजाकत को देखते हुए पहले आरोपी गनर को लाईन हाजिर कर दिया और दोना जांचो को निरस्त करते हुए इसकी पुनः जांच कराने की जिम्मेदारी अपर पुलिस अधीक्षक देहात को सौप दिया है। अब आप इसी से अंदाजा लगा सकते है कि जब  जागरूक पत्रकारो के साथ पुलिस अधिकारियों को यह रवैया है तो आम जनता के साथ ये पुलिस के लोग कितना न्याय करते होगें।
हम आपको बताते चले कि 2002 में समाजवादी सरकार ने नगर की जनता को जाम की समस्या से निदान दिलाने के लिए  शाहीपुल के बराबर एक सद्भावना पुल का निर्माण कराया था लेकिन इन्ही मंत्री और नेताओ के कारस्तानी के चलते इसका श्रेय तत्कालिन जिलाधिकारी अनुराग यादव ले गये और 2007 विधानसभा चुनाव में यहा की दस सीटो में से मात्र तीन सीटे सपा के खाते में आयी थी।
यदि मंत्रियो नेताओ का यही रवैया रहा तो आने वाले विधानसभा चुनाव में सपा का खाता खुलना मुश्किल हो जायेगा।


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