धनंजय सिंह की बसपा में वापसी से भाजपा को हो सकता नुकसान
https://www.shirazehind.com/2016/09/blog-post_17.html
जौनपुर। बसपा सुप्रिमो मायावती ने आज इलाहाबाद की रैली में पूर्व सांसद धनंजय सिंह को एक बार फिर से अपनी पार्टी शामिल कर लिया है। धनंजय की बसपा में वापसी से जिले के राजनीतिक समीकरण बदल गया है। पूर्व सांसद को बसपा में पहुंचने से इसका सीधा असर भाजपा पर पड़ता दिखाई पड़ रहा है। क्यो कि कांग्रेस कमजोर होने के बाद से जिले के अधिकांश क्षत्रिय मतदाता बीजेपी को वोट करता चला े आ रहा े हैै। धनंजय सिंह मौजूदा समय में राजपूतो के नेता माने जाते है उनका जिस तरफ इशारा होता है उधर ही क्षत्रियों की धारा मुड़ जाती है।
मालूम हो कि पूर्व सांसद धनंजय सिंह 2009 लोक सभा चुनाव में बसपा की हाथी पर सवार होकर दिल्ली पहुंचे थे। 2012 विधानसभा से पूर्व मायावती से अनबन होने के बाद उन्हे पार्टी से निकाल दिया गया था। लोकसभा चुनाव 2014 में वे दिल्ली जेल में बंद रहते हुए निर्दल प्रत्याशी रूप चुनाव लड़े थे। इस चुनाव में उनकी जमानत जब्त हो गयी थी। जेल से बाहर आने के बाद धनंजय लगातार बसपा में पुनः शामिल होने के लिए पूरी ताकत झोक दिया था। आज मायावती ने उन्हे पार्टी में शामिल कर लिया है। धनंजय एक बार हाथी पर सवार हुए तो भाजपाईयों को पसीने निकलने लगे है। क्यो कि जिले का अधिकांश क्षत्रिय मतदाता उन्हे अपना नेता मान चुका है।
मालूम हो कि पूर्व सांसद धनंजय सिंह 2009 लोक सभा चुनाव में बसपा की हाथी पर सवार होकर दिल्ली पहुंचे थे। 2012 विधानसभा से पूर्व मायावती से अनबन होने के बाद उन्हे पार्टी से निकाल दिया गया था। लोकसभा चुनाव 2014 में वे दिल्ली जेल में बंद रहते हुए निर्दल प्रत्याशी रूप चुनाव लड़े थे। इस चुनाव में उनकी जमानत जब्त हो गयी थी। जेल से बाहर आने के बाद धनंजय लगातार बसपा में पुनः शामिल होने के लिए पूरी ताकत झोक दिया था। आज मायावती ने उन्हे पार्टी में शामिल कर लिया है। धनंजय एक बार हाथी पर सवार हुए तो भाजपाईयों को पसीने निकलने लगे है। क्यो कि जिले का अधिकांश क्षत्रिय मतदाता उन्हे अपना नेता मान चुका है।

