हिन्दू महापंचायत को लेकर जिला व पुलिस प्रशासन की बढ़ी बेचैनी!
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जौनपुर।
युवा हिन्दू वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह द्वारा 5 सितबर को
केराकत कूच करने के साथ हिन्दू महापंचायत का समय सन्निकट आते देख जिला व
पुलिस प्रशासन की बेचैनी बढ़ती नजर आने लगी है। वहीं इसको लेकर केराकत सहित
जनपद के सभी क्षेत्रों में चर्चा का विषय भी बना हुआ है जिसकी बू दूसरे
जनपदों में भी लोग सूंघ रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि महापंचायत की
तैयारियों सहित किसी भी स्थिति से निपटने के लिये वाराणसी मण्डल के
पदाधिकारियों ने केराकत का दौरा किया। साथ ही महापंचायत को सफल बनाने की
रणनीति का जायजा भी लिया। चर्चाओं की मानें तो राष्ट्र विरोधी नारे लगाये
जाने के विरोध में केराकत बंद के दौरान पुलिस की तानाशाही रवैया सामने
दिखा। सत्ता पक्ष के दबाव में एकपक्षीय कार्यवाही में पुलिस द्वारा पाबंद
किये गये हिन्दू युवकों को जमानत कराये जाने के बावजूद भी पुलिस उनका पीछा
नहीं छोड़ रही है। लोगों के अनुसार उनके घरों पर दस्तक देने के साथ ही 50
हजार रूपये के मुचलके भरे जाने की आड़ में भयादोहन शुरू कर दिया गया है।
सूत्र बताते हैं कि युवा हिन्दू वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह
द्वारा गत दिवस जनपद आगमन के दौरान मदरसा संचालक की गिरफ्तारी व हिन्दू
महापंचायत की घोषणा से जिला व प्रशासन बेचैन हो उठा है। चर्चा है कि हिन्दू
महापंचायत को विफल करने की नीति व सत्ता के दबाव में जिला व पुलिस प्रशासन
आंतरिक रूप से हिन्दू वर्ग के लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से पुलिसिया
कार्यवाही का भय दिखाकर उन्हें विचलित करना शुरू कर दिया गया है। सूत्रों
की मानें तो राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में अपरोक्ष रूप से लगे तत्वों को
दूध का धुला साबित करने के लिये सत्ता के दबाव में जिला व पुलिस प्रशासन
द्वारा ग्रामीणांचलों के 18 से 25 वर्ष तक के युवाओं को हिन्दू युवकों का
नाम देने हेतु ग्राम प्रधानों पर दबाव बनाया जा रहा है, ताकि मनमानी तरीके
से पाबंद करके 5 सितम्बर को होने वाले हिन्दू महापंचायत को विफल किया जा
सके। नाम न छापने की शर्त पर कुछ प्रधानों ने बताया कि उन्होंने प्रशासन के
इस निर्णय को पूरी तरह से मानने से इनकार कर दिया है। सूत्र बताते हैं कि
जिला व पुलिस प्रशासन के दबावपूर्ण निर्णय को नहीं मानने पर उन्हें अंजाम
भुगतने की धमकी भी दी गयी। बताया जाता है कि केराकत बंद के दौरान जिन
हिन्दू युवकों को पाबंद किया गया है, उनमें यादव वर्ग के युवकों की संख्या
सबसे अधिक है। उसके बाद सोनकर वर्ग के युवकों सहित अन्य जाति के युवक हैं।
जनचर्चा है कि सत्ता पक्ष से खासा सम्बन्ध रखने वाले यादव वर्ग के सबसे
अधिक संख्या में पाबंद किये गये युवकों को सम्बन्ध किये जाने के पीछे कहीं
प्रशासन की सोची-समझी रणनीति तो नहीं है। उन्हें मामले से अलग करने का का
कार्य से दूसरा वर्ग खासा नाराज है। चर्चाओं के अनुसार राष्ट्र विरोधी
गतिविधियों में संलग्न एक व्यक्ति विशेष को बचाने के लिये जिला व पुलिस
प्रशासन निर्दोषों को दंगा भड़काने व अशान्ति पैदा करने की धाराओं में पाबंद
करके आग में घी डालने का कार्य किया गया है। इतना हह नहीं, लगता है कि
अपनी विफलताओं पर पर्दा डालने के लिये आगे भी एकपक्षीय कार्यवाही हो सकती
है।

