रावण के पुतलों को दे रहे अन्तिम रूप

 जौनपुर। रामलीलाओं का दौर समाप्ति की ओर बढ़ रहा है । इसको देखते हुए दशहरा पर रावण के पुतले बनाने का तेजी से चल रहा है। कागज और बांस की मंहगाई के कारण पुतलो  की कीमत भी बढ़ गयी है लेकिन इस पुस्तैनी धन्धे से जुड़े लोग अपने कर्तव्यो  का निर्वाह करते चले आ रहे हैं। शहर के अलफस्टीनगंज मोहल्ले में पिछले पचास साल से राम दुलार शर्मा रावण का पुतला बनाते थे। उनके गुजर जाने के बाद यह काम उनके पुत्र रामजी शर्मा करने लगे और पिता के धन्धे से जुड़ गये। उन्ह¨ने बताया कि दशहरा के एक महीने पहले ही पुतला बनाने का काम शुरू कर दिया जाता है। मंहगाई के इस दौर में किसी प्रकार दाल रोटी का जुगाड़ हो जाता है। शर्मा पण्डित जी राम लीला समिति, गोसाई राम लीला समिति तथा हनुमान घाट की राम लीला से सम्बन्धित रावण के पुतले कई साल से बनाते आ रहे हैं। पुतले बनाने का काम आर्डर पर किया जाता है। तीन हजार से दस हजार तक में पुतले तैयार हो जाते हैं। इनमें पटाखे आदि अलग से बांधे जाते है। ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई के कारण पुतले का मुंह आकर्षक बनाने के बाद पूरा हिस्सा अखबारी कागज से निर्मित किया जाता है। जिले में सैकड़ों स्थानों पर रावण दहन किया जाता है और उसे बनाने का काम कुछ विशेष लोग ही अंजाम देते है। रामलीला समितियां इसके लिए पेशगी धनराशि देती है और पुतले तैयार होने पर निर्धारित स्थानों पर लगाये जाते है।


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