समस्याओं का समाधान भगवान का भजन
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जौनपुर। मुगराबादशाहपुर कस्बा स्थित शक्तिपीठ माॅ काली मन्दिर के विशाल परिसर मे चल रहे श्री मद् भागवत कथा के तीसरे दिन मुरारी बापू ने भक्तों के बीच कहा कि भागवत पुराण श्रवण करने से जीवन जीने की कला का बोध होता है। उन्होने कहा कि भागवत पुराण अपने आप मे साध्य व मोक्ष प्राप्ति का साधन है। संत्संग महिमा पर प्रकाश डालते हुये उन्होने कहा कि संत्संग ही संत का प्रसाद है। संसार असार है भजन सार है। सभी समस्याओं का समाधान भगवान का भजन है। मानस मे लिखा है कि साधु संतों को निन्दा सुनना गोहत्या के समान है। शंकर जी कहते है कि दूसरे के पाप को किसी से कहना नही चाहिए। दूसरे की निन्दा करना छोड कर भगवान की आराधना करना चाहिए। यही मनुस्य शरीर का सबसे बडा फल है। जीवन को तो सूप के समान होना चाहिए। जब तक भगवान की शरण नही मिलेगा तब तक आवागमन का चक्कर बना रहेगा। संसार एक जंगल है जिसमे छः लुटेरे है। काम क्रोध मोह लोभ मद मत्सर।इनसे बचना चाहिए। मनुस्य को इन लुटेरों से दूर रहकर जीवन मे पुन्यों को संचय करना चाहिए।महापुरूषों की शरण मे जाने से पुण्य मिलता है।देवता तो भगवान को मित्र मानते है। बीच बीच मे गीतों एवम भजनों ने श्रोताओं को बांध रखा था। भागवत पुराण महोत्सव के मुख्य यजमान आयोजक सुरेश सोनी पत्नी कुसुमलता सोनी तथा उनका परिवार संतो एवम श्रोताओं के स्वागत सत्कार मे लगा रहा। हारमोनियम पर यज्ञ शरण मिश्रा तबला पर कुलदीप मिश्रा की बोर्ड पर कृष्ण कुमार मौर्य गायन पर विकेत सिंह संगत कर रहे थे।

