नोट बंदी का असर मज़दूरों के पेट पर : जगदीश राय
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जौनपुर। नोट बंदी का असर मौजूदा समय में गरीबो मज़लूमो और मजदूरो पर पड़ा है। ये लोग रोज कमाते है रोज खाते है। जिस दिन से एक हजार - पांच रूपये बंद किया गया है उस दिन से ये लोग भुखमरी के कगार पहुंच गए है। उक्त बाते पूर्व कैबिनेट मंत्री व बीएसपी के बरिष्ठ नेता जगदीश राय ने आज शिराज़ ए हिन्द डॉट काम से विशेष बातचीत में कहा। श्री राय ने बताया कि बीते आठ नवम्बर से प्रधान मंत्री नरेद्र मोदी ने अचानक पांच सौ और एक हजार को नोट बंद कर दिया। इसका असर तो अमीरो पर तो कम हुआ लेकिन रोज कमाने रोज खाने वाले गरीबो मज़दूरों के सामने रोजी रोटी का संकट आ गया है। इस मुख्य कारण है कि नोट बंदी के कारण बन रहे घर मकान का कार्य रुक गया। घर मकान बनवाने वाले नोट बदलने और पैसा निकालने के लिए बैंको में लाइन लगाये हुए। इसके बाद भी बैंक से उतना ही पैसा मिल रहा है जितने में घर का खर्च भी चलना मुश्किल हो गया है। उधर पैसो की कमी के कारण बाहर से आने वाला गिट्टी , बालू , सरिया भी नही आ रहा है जिसके कारण इस व्यवसाय में लगे मजदूरो को दो जून की रोटी नही मिल रही है। रूपये की कमी के कारण किसानो के खेती नही कर पा रहे है खेतिहर मजदूरो को काम नही मिल रहा है।

