डेगूं के डंक से भयाक्रान्त हो रहा शहर
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जौनपुर। सरकारी चिकित्सालयों से लेकर प्राइवेट असपतालों में डेगूं , मेलेरिया सहित अन्य बीमारियों से ग्रसित लोगों की भरमार हो गयी है। कई दर्जन जहां मौत के शिकार बन गये है और तमाम लोग इसकी गिरफ्त में आकर बाहरी अस्पतालों में भी इलाज करा रहे है। इसकों देखते हुए प्रदेश सरकार ने अलर्ट जारी कर रखा है और विशेष सतर्कता के निर्देश दिये गये है। कोर्ट ने भी हस्तक्षेप करते हुए इन बीमारियों से ग्रसित लोगों की जान की रक्षा के लिए विशेष कदम उठाने के निर्देश दिये गये है। परन्तु इन स्थितियों की जड़ माने जाने वाले डेगूं मच्छरों की रोक थाम के लिए कोई विशेष प्रयास नहीं किया जा रहा है। शहर के लोगों का कहना है कि हर साल तो डेगूं की इतनी भयानक स्थिति नहीं होती थीं। इसका मूल कारण समय समय पर फांिगग न होना। पूरे सीजन मेें एक बार फांिगग करायी गयी। हालत यह रहा कि मच्छर नहीं मरे बल्कि सड़कों से घरों में घुस गये। इसके लिए चिकित्सा भी कम जिम्मेदार नही है। जिले के चिकित्सालयों के पास डेगूं के मरीजों का आकड़ा उपलब्ध नही है। नगर पालिका का स्वास्थ्य विभाग भी आंख बन्द कर बैठा है। जगह जगह नालियां जाम होकर सड़कों पर पानी बह रहा है। अनेक स्थानों पर कूड़े और पानी बजबजा रहे है। गन्दगी और कूड़े स्वच्छता की पोल खोल रहे है। स्वच्छता की अलग जगाने वाले सांसदों और अन्य जनप्रतिधियों ने बहुत पहले झाड़े लेकर फोटो खिचवाया उसके बाद फिर से गन्दगी की ओर देखना भूल गये।

