भागवत पाठ से होता है कष्ट का निवारण



जौनपुर। मुंगराबादशहपुर के प्रख्यात शक्तिपीठ माॅ काली जी मन्दिर केे विशाल परिसर मे चल रहे श्री मद भागवत कथा के चैथे दिन मुरारी बापू ने भक्तों के बीच कहा कि श्री मद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ गीता के समान है। भागवत पुराण मे कुल 12 स्कन्ध है। तृतीय से 12 वे स्कन्ध तक भागवत पुराण की महता का उल्लेख किया गया है। चैथे स्कन्ध मे धुव की कथा है। षष्टम मे अजामिल की चर्चा की गई है। 5 वें स्कन्ध मे मन्वन्तरिलीला का वर्णन है। सप्तम स्कन्ध मे भक्त प्रहलाद की कथा है। 14 मन्वन्तरि का एक कल्प होता है पूरे कल्प तक ब्रहमा जी सृष्टि की रचना करते है। प्रत्येक मन्वन्तरि मे भगवान का कोई ना अवतार होता है। चैथे स्कन्ध मे गजेन्द मोक्ष की कथा है। जो इसका पाठ करता है उसे सारे दुख से मुक्ति मिल जाती है। कथा को बढाते हुए उन्होने कहा की सीता हरण करने के लिये जब रावण मारीच के पास जाता है मारीच ने राम की अपार शक्ति के बारे मे कही कि राम तो 14 हजार राक्षसों के सेना का संहार किया है। उन्होने कहा कि भागवन ने कच्छप अवतार लेकर समुद्र का मंथन किया। मंथन मे 14 रत्न सहित क्षीरसागर से बिस निकला शंकर ने बिष पान कर महादेव के रूप स्थापित हुए। श्री बापू ने कहा कि संसार मे कोई पूर्ण नही है केवल भगवान पूर्ण है जिसमे राम व कृष्ण है कथा के अन्त मे कृष्ण जन्मोत्सव की अदभुत झाॅकी देखाई गई।

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