सूर्य को अर्घ्य के साथ समाप्त हुआ डाला छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान
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दूध व जल से अर्घ्य देने के बाद सुहागिनों को दिया गया सिन्दूर का दान
जौनपुर। सोमवार को तड़के उगते सूर्य को दूध एवं जल से अर्घ्य देकर डाला छठ के चार दिवसीय अनुष्ठान का समापन हो गया जिसके बाद व्रती महिलाओं ने पूजा में शामिल सुहागिनों को सिन्दूर भेंट किया। साथ ही परिवार की सुख, शान्ति, समृद्धि सहित अखण्ड सौभाग्य की कामना किया। इसके बाद छठ माता की आस्था से जुड़े गीत गाती हुईं व्रती महिलाएं घर वापस चली गयीं जहां रास्ते में उन्होंने लोगों को प्रसाद भी वितरित किया। इस दौरान उनके साथ आये पुरूष परम्परानुसार पूजा की टोकरी को अपने सिर पर लेकर चल रहे थे। इसके पहले छठ महाव्रत की कड़ी में कार्तिक शुक्ल सप्तमी यानी सोमवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के लिये व्रती महिलाएं तड़के 3 बजे से गोमती, सई सहित अन्य नदियों, तालाबों, पोखरों, जलाशयों पर एकत्रित होने लगीं। गन्ने के जूट को पानी में गाड़कर महिलाएं स्वयं कमर भर पानी में खड़ी होकर आराधना शुरू कर दीं और गुड़ व घी से बने ठेकुआ, फल, मूली, सुथनी, हल्दी, हरी सब्जी, ईख, नारियल सहित अन्य पूजन सामग्रियों से भरे बांस की टोकरी को छठी माई के चरणों में समर्पित कर दीं। सूर्योदय होने पर भक्तांे ने भगवान भाष्कर को दूध व जल से अर्घ्य दिया जिसके बाद पूजा में शामिल महिलाओं ने उन्हंे सिन्दूर लगाया और छठी माई से सम्बन्धित गीत गायीं। अर्घ्य व पूजा के साथ डाला छठ के चार दिवसीय अनुष्ठान का समापन हो गया जिसके बाद प्रसाद वितरित करते हुये महिलाओं ने व्रत का तारण किया। शाहगंज संवाददाता के अनुसार स्थानीय रामजानकी मन्दिर बौलिया में छठी मइया की पूजा के लिये हजारों की भीड़ उमड़ी। इस दौरान लोगों ने श्रद्धा व भक्ति से पूजा किया जिसके बाद प्रसाद का वितरण किया। इस जगह किनारे भगवान सूर्य की आकृति और तालाब के बीच में भगवान भोले शंकर की प्रतिमा आकर्षण का केन्द्र बना रहा। क्षेत्रीय लोगों द्वारा पूजनार्थियों के लिये अच्छी व्यवस्था की गयी थी। इस दौरान एक महिला के गले से सोने का चेन किसी ने पार कर दिया तथा कई लोगों की जेब भी कट गयी जबकि पुलिस बल भारी मात्रा में तैनाती रही लेकिन उनके आगे चोर-उचक्के, स्कैनर सफल रहे। इसके अलावा अन्य जगहों पर भीड़ रही।
