जननी सुरक्षा में बे्रकर बनी डाक्टरों की कमी

जौनपुर। सरकार द्वारा महिलाओं के प्रसव के लिए चलाई जा रही जननी सुरक्षा योजना सफल होती नहीं दिख दिख रही है। शासन द्वारा महिलाओं को प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है। इसके बावजूद सरकारी अस्पतालों के प्रति महिलाओं का रुझान नहीं बढ़ रहा है। सरकारी अस्पतालों में प्रसव के लिए महिलाओं को आकर्षित करने हेतु जननी सुरक्षा योजना शुरू की गई थी। अस्पतालों में प्रसव कराने पर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को 14 सौ रुपए तथा शहरी महिलाओं को एक हजार रुपए प्रोत्साहन राशि दी जाती है। शासन की मंशा है कि महिलाओं को कम खर्च में बेहतर सुविधाएं दी जाएं। लेकिन जिले के पीएचसी व सीएचसी में महिला डॉक्टर की कमी के चलते महिलाओं का रुझान बढ़ने के बजाय निरंतर घट रहा है। ग्रामीण व गरीब तबका छोड़ दिया जाए तो शहरी व बड़े घरों की महिलाएं सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराना पसंद नहीं करतीं। महिला डाक्टर न होने से प्रसव पीड़ा से तड़प रही महिलाओं को तत्काल अन्यत्र रेफर कर दिया जाता है। जननी सुरक्षा जैसी महत्वपूर्ण योजना महिला डाक्टर के न होने से ढाक के तीन पात साबित हो रही है। कई बार लोग महिला डॉक्टर की तैनाती की आवाज उठा चुके हैं लेकिन कुछ नहीं हुआ। कुछ समय के लिए तैनाती भी हुई तो वह डाक्टर भी एक-दो माह में स्थानान्तरण पर चली गईं।

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