कौम अपने बुर्जगों को याद रखे: मौलाना महफुजूल हसन खां
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जौनपुर।
शिया जामा मस्जिद इन्तेजामिया कमेटी एवं जौनपुर अजादारी कौंसिल के संयुक्त
तत्वावधान में बाद नवाज जुमा मौलाना सैयद निसार मेंहदी साहब किब्ला के
इसाले सवाब की मजलिस आयोजित की गयी। मजलिस को खेताब फरमाते हुए इमाम ए जुमा
आली जनाब मौलाना मजफुजूल हसन खां ने कहा कि कौम को अपने बुर्जुगों की
खिदमत को याद रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि मौलाना निसार मेंहदी साहब शहर की
दीनी खिदमत की। उन्होंने नमाज-ए-जुमा भी कई वर्षों तक शिया जामा मस्जिद
में पढ़ाई व शिया कालेज में दीनियात के अध्यापक के तौर पर दीन की खिदमत की।
तद्उपरान्त मौलाना महफुजूल हसन खां ने कर्बला की मार्मिक घटना का जिक्र
करते हुए कहा कि हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) ने मानव कल्याण के लिए जो
कुर्बानियां दी है। उसकी मिशाल रहती दुनिया तक नहीं पेश की जा सकती। हजरत
इमाम हुसैन के मसायब को सुनकर उपस्थित जनसमूह की आंखे नम हो गयी।
मजलिस में आये हुए लोगों का शिया जामा के मुतवल्ली अली मंजर डेजी ने शुक्रिया अदा किया व तब्बरूक तकसीम किया।
मजलिस
की समाप्ति पर उपस्थित मोमनीनों ने मरहूम मौलाना नेसार मेंहदी साहब के लिए
सुरअफातेहा पढ़ा। मजलिस में मुख्य रूप से जौनपुर अजादारी कौंसिल के अध्यक्ष
सै. मोहम्मद हसन, मौलाना मुस्तफा इस्लामी, एएम डेजी, तालिब रजा शकील
एडवोकेट, असलम नकवी, डा. हाशिम खां, मो. मुस्लिम हीरा, तहसीन अब्बास सोनी,
काजी आफताब अहमद, हसन अब्बास, अहमद, इस्तेयाक हुसैन कर्बलाई, पप्पू इत्यादि
लोग मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

