ईष्ट के आदर्श कार्य व्यवहार में उतारें: बिकीं चक्रवर्ती
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जौनपुर। केद्रीय सत्संग देवघर से आये श्रीश्री ठाकुर अनुकूल चन्द के प्रपौत्र बिंकी चक्रवर्ती ने कहा है कि ठाकुर के नाम पर सभी आपस में मिलकर एक दूसरे से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ते रहे। उसी प्रेरणा से अपने काम में लगे रहकर प्रभु के आदर्शो का पालन करें। यजन, याजन और ईष्टभृत्ति का परिपालन निष्ठा के साथ करते रहिये। उक्त बाते श्री चक्रवर्ती ने शुक्रवार को लाइन बाजार कलेक्ट्रेट रोड स्थित कमला नगर हुसैनाबाद के नवनिर्मित सत्संग बिहार के उद्घाटन करने के उपरान्त दूर दराज से आये बड़ी संख्या में लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा। उन्होने कहा कि प्रेरणा लेना तपस्या का अंग है। मन्दिर के उन्नति में सहयोग करें। ठाकुरजी द्वारा बताये गये रास्ते पर चलते रहे। आपस में मिलते रहने से मन निर्मल होता है। सबका सोच विचार एक होता है तो सुन्दर समाज की रचना होती है। एक पथ पर चलते रहिये, अपने कर्म करते रहिए। जीवन को सुन्दर बनाने का यही उपाय है। सबके जीवन में आनन्द लाने का प्रयास करे। इससे जीवन में सुख शान्ति कायम रहेगी। निष्ठा भक्ति और प्रेम जीवन में लाये। ऐसा कार्यव्यवहार करेंकि ठाकुर की ज्योति शरीर और आंखों से निकले। चलन, चरित्र, चिन्तन और कथन में ईष्ट प्रकट होना चाहिए। सबके जीवन में शान्ति, समृद्धि आरोग्य का समावेश हो। इसके पूर्व उन्होने श्रीश्री ठाकुर, बड़ं मां, बड़दा और वर्तमान आचार्य की प्रतिमा का अनावरण किया। अन्य वक्ताओं ने कहा कि सत्संग का उद््देश्य है कि मनुष्य को प्रकृति मनुष्य बनाना। संत्संग कभी सम्प्रदाय में विश्वास नहीं करता। धर्म कभी बहु नहीं होता। धर्म एक है। सवरिवेश जीवन वृद्धि के पथ पर चलना ही धर्म का प्रधान लक्ष्य है। ठाकुर ऐसे ही धर्म के मूल आदर्श है। वे किसी सम्प्रदाय विशेष के नहीं बल्कि सभी सम्प्रदाय ही उनके है। वक्ताओं ने ठाकुर को युग पुरूषोत्तम व सुगावतार बताते हुए कहा कि चरण पूजा का अर्थ है चलन पूजा, चरित्र पूजा जिनकी पूजा कर रहे है उनका चलन अपने भीतरण आत्मसात कर उसी तरह से चलना। ठाकुरजी के आदर्श का प्रचार आज के विषम परिस्थियों में आवश्यक है। मानव व्याकुलता, भय, पारिवारिक विघटन एवं दिशाहीनता की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में दायित्व है कि सही मायने में प्रगति के पथ पर चलने एवं बचने , बढ़ने में सहायक बने। वक्ताओं में देवघर के दीपानन्द प्रसाद, आजमगढ़ के कृष्ण मोहन अस्थाना, बगलौर के प्रो0 रघुपति सहाय रहे। अध्यक्षता काली प्रसाद सिंह व आभार डा0 निलेश श्रीवास्तव ने व्यक्त किया। इस अवसर पर सैकड़ों लोगों ने दीक्षा ग्रहण किया। मन्दिर को कोलकाता से आये कलाकारों द्वारा भवय सजावट किया गया था। जो अलौकिक कला विखेर रही थी। मन्दिर के बगल में भव्य पंण्डाल बनाया गया था। देवघर से आये सपन कुमार मण्डल, अमित पोई ने अपने भजनों ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर विभिन्न जनपदों से हजारों की संख्या में ठाकुर के अनुयायियों ने हिस्सा लिया।

