रईस बनने की फिराक में ब्याज का खेल
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जौनपुर। सूदखोरी का धंधा जिले भर में नया नहीं काफी पुराना है। बस्तियों से लेकर अमीर कॉलोनी तक सूदखोर बैठे हैं। कई तो ऐसे पेशेवर लोग हैं, जो अपने पेशे में खासा नाम रखते हैं, लेकिन कमाई को छिपाने के लिए शहर के प्रमुखजनों को मोटी रकम ब्याज पर उठाने से गुरेज नहीं करते। इससे इनकी रकम भी सुरक्षित रहती है तो मुनाफा भी, लेकिन इन पुराने साहूकारों का तरीका जुदा है। सूदखोरी के धंधे के नाखून जहरीले हुए हैं उन नए कदमों की आहट से, जो चंद रोज में रईस बनने की फिराक में मोटी ब्याज का खेल खेलने लगे।
जिले में हर रोज सूदखोरी के ठिकानों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है। पिछले पांच वर्ष में यह धंधा तेजी से बढ़ा है। कई युवा हैं जो कॉलेज की पढ़ाई छोड़ने के बाद किसी अन्य कारोबार में जाने की बजाए सूदखोरी के धंधे से जुड़ गए हैं। गरीबों व दुकानदारों को ब्याज पर रकम देकर किस्तों में वसूली इनका पेशा बन गया है, लेकिन मामला उस वक्त बिगड़ जाता है जब कोई गरीब बीमारी या किसी अन्य कारण से ब्याज एवं सूद चुकाने में असमर्थ हो जाता है। अगर देखें तो सूदखोरी के अड्डे जगह-जगह पर संचालित हो रहे हैं। चाय की दुकान से लेकर शहर की दुकानों तक इनका कॉकस सक्रिय है। जहां पुराने साहूकार बड़े से बड़ा झटका भी झेलने का साहस रखते हैं। जल्दी रईस बनने की चाह में इस धंधे में उतरने वालों में साहस नहीं। कम वक्त में ज्यादा कमाई की चाहत में नाजायज दबाव
सूदखोरों के निशाने पर शहर के शौकीन मिजाज पुश्तैनी रईस भी हैं। जिनके पास लंबी-चैड़ी जायदाद तो है लेकिन धन नहीं। इनको अपने जाल में फंसाकर सूदखोर मोटी ब्याज वसूलते हैं। इन्हें लाखों रुपया ब्याज पर देने के पीछे सबसे बड़ी वजह है इनके नाम में दर्ज वो संपत्ति। रकम की वापसी न होने पर यह संपत्ति को अपने नाम करने के लिए दबाव बनाते हैं।
जिले में हर रोज सूदखोरी के ठिकानों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है। पिछले पांच वर्ष में यह धंधा तेजी से बढ़ा है। कई युवा हैं जो कॉलेज की पढ़ाई छोड़ने के बाद किसी अन्य कारोबार में जाने की बजाए सूदखोरी के धंधे से जुड़ गए हैं। गरीबों व दुकानदारों को ब्याज पर रकम देकर किस्तों में वसूली इनका पेशा बन गया है, लेकिन मामला उस वक्त बिगड़ जाता है जब कोई गरीब बीमारी या किसी अन्य कारण से ब्याज एवं सूद चुकाने में असमर्थ हो जाता है। अगर देखें तो सूदखोरी के अड्डे जगह-जगह पर संचालित हो रहे हैं। चाय की दुकान से लेकर शहर की दुकानों तक इनका कॉकस सक्रिय है। जहां पुराने साहूकार बड़े से बड़ा झटका भी झेलने का साहस रखते हैं। जल्दी रईस बनने की चाह में इस धंधे में उतरने वालों में साहस नहीं। कम वक्त में ज्यादा कमाई की चाहत में नाजायज दबाव
सूदखोरों के निशाने पर शहर के शौकीन मिजाज पुश्तैनी रईस भी हैं। जिनके पास लंबी-चैड़ी जायदाद तो है लेकिन धन नहीं। इनको अपने जाल में फंसाकर सूदखोर मोटी ब्याज वसूलते हैं। इन्हें लाखों रुपया ब्याज पर देने के पीछे सबसे बड़ी वजह है इनके नाम में दर्ज वो संपत्ति। रकम की वापसी न होने पर यह संपत्ति को अपने नाम करने के लिए दबाव बनाते हैं।

