जननी सुरक्षा में पिछड़ रहे सरकारी अस्पताल
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जौनपुर। स्वस्थ मां, स्वस्थ संतान और तुरंत भुगतान का नारा अस्पतालों में फिलहाल बेमानी साबित हो रहा है। सरकार का यह फंडा जनपद में कारगर होता नहीं दिख रहा है। तमाम प्रयास के बाद भी जननी सुरक्षा योजना में जनपद लगातार पिछड़ रहा है। जिला महिला अस्पताल में प्रसव दर घटकर निचले पायदान पर आ पहुंचा है। प्रसव के लिए महिलाएं कहां जा रही हैं सवाल उठने लगा है। पिछले साल की अपेक्षा इस साल प्रसव कम हुए। भारत सरकार जच्चा-बच्चा सुरक्षा के लिए जननी सुरक्षा योजना चला रखी है। देखरेख और संचालन की जिम्मेदारी जिला महिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की है। शुरुआती दौर में इस योजना के प्रति गर्भवती महिलाओं का लगाव तो हुआ, लेकिन लाभ मिलने में होने वाली तमाम झंझटों को देख लोगों ने अब इनसे किनारा कसना शुरू कर दिया है। अस्पताल में समय से चिकित्सा सेवा का न मिलना, एंबुलेंस देर से पहुंचना, प्रसूताओं को देर से भुगतान मिलना, सुविधाशुल्क आदि ने लोगों को इन योजनाओं के प्रति उदासीन कर दिया है। प्राइवेट नर्सिंग होम भी मरीजों को अपने यहां ले जाने के लिए तरह-तरह का झांसा देते हैं। हालत यह है कि कभी-कभी तो जबरन सरकारी अस्पतालों से मरीज उठा लिए जाते हैं। अस्पताल प्रशासन की मानें तो जिला महिला अस्पताल में इसलिए प्रसव दर घट गई है क्योंकि सीएचसी में सक्रिय हो गए हैं। हालांकि जानकार बताते हैं कि सीएचसी में प्रसव का हाल तो काफी खराब है। ज्ञात हो कि गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने के लिए सरकार प्रोत्साहन राशि प्रदान करती है। यह सुविधा जिला महिला अस्पताल समेत सभी सीएचसी पर है। यहां प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं को 14 सौ रुपये दिया जाता है। सालभर से यह भुगतान चेक के बजाए सीधे खाते में किया जाता है। प्रसव के बाद तत्काल भुगतान का आदेश है, लेकिन इसका पालन फिलहाल होता नहीं दिख रहा है। हाल यह है कि तीन-तीन माह तक प्रसूताओं के खाते में धन नहीं पहुंच रहा है। ऐसे में उन्हें इस राशि के लिए अस्पताल का चक्कर लगाना पड़ रहा है।

