तीन तलाक मुस्लिम औरतो पर लटकती तलवार: डा0 जान्हवी
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जौनपुर। पूरे भारत वर्ष मेें महिला सशक्तिकरण पर आये दिन संगोष्ठी एवं सेमिनार जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते है। पर इसी समाज की एक वर्ग की महिलाओ की स्थिति आज भी ऐसी है जिनके सिर पर तीन तलाक की तलवार हमेशा लटकती रहती है। जिसे तमाम धर्मगुरू अपने धर्म से जोड़कर सही ठहराने की कोशिश में लगे है। परन्तु हम सभी जानते है कि किसी भी धर्म में महिलाओ के शोषण उनकी असुरक्षा आदि से सम्बधित एक वाक्य भी नही लिखा नही हो सकता है। तीन तलाक कुछ तथाकथित मौलानाओ का बनाया हुआ एक आसान तरीका है अपनी औरतो पर अत्याचार करने का। ऐसे लोग महिलाओ को भोग का सामान ही समझते है और कुछ नही। तीन तलाक मुस्लिम समाज में कुप्रथा के समान व्याप्त है। यह एक ऐसी कुप्रथा है जिसको खत्म करने के लिए आरएसएस और भाजपा के कुछ नेताओ ने जिस प्रकार शंखनाद किया है। यदि इन्हे युगपरूष भी कहा जाय तो यह अतिशयोक्ति नही होगा। इसमें आज के युग की पढ़ी लिखी मुस्लिम महिलाओ ने भी बढ़चढकर कदम से कदम मिलाकर इस घिनौने कुप्रथा को खत्म करने का साहस जुटाकर आगे आ रही है। अत्यंत ही सराहनीय है। एक समय था जब धर्मगुरूओ का ही बोलबाला हुआ करता था। उस समय बाल विवाह, सती प्रथा आदि जैसी कुप्रथाएं अपने चरम पर थी। राजा राम मोहन राय, लार्ड विलियम वैटिक जैसे महापुरूषो एवं बुध्दजीवियो ने आगे बढ़कर इन कुप्रथाओ को खत्म किया साथ में लोगो को जागरूक भी किया। जब जब जिन जिन युग पुरूषो ने महिलओ के शोषण का प्रबल विरोध किया तब तब उन्हे धर्मगुरूओ एवं समाज के अशिक्षित व्यक्तियो के विरोध का भी कड़ा सामना करना पड़ा।
विषय जब महिला उत्थान का हो ,महिला के आत्मसुरक्षा के भेदभाव का, आत्म सम्मान का हो, महिला शक्तिकरण का हो तो मुद्दा और भी संवेदनशील हो जाता है। ऐसे में सभी महिलाओ के लिए चाहे वह जिस वर्ग से हो। संवैधानिक नियम एवं कानून ही मान्य होना चाहिए। क्योकि कोई भी धर्मग्रन्थ चाहे कुरान, गीता या बाईबिल कुछ भी हो किसी देश के संविधान से ऊपर नही हो सकता। यह तो समाज का हर वर्ग मानता है कि शादी टूटना अच्छा नही है। ऐसे में यदि एक वर्ग अपनी सुविधानुसार अपने धर्म का हवाला देकर कहे कि हमारे धर्म में तीन तलाक है और वह तलाक-ए-बिदअत के तहत तीन तलाक एक साथ दे सकता है तो सरासर अपने औरतो पर अत्याचार करता है। और औरत को सिर्फ भोग का वास्तु ही समझता है। क्योकि तीन तलाक एक साथ देने से न तो पति-पत्नी एक साथ रह सकते है न दुबारा शादी कर सकते है न समझौता की कोई जगह रह जाती है और ही तलाक वापस लिया जा सकता है। समाज के प्रत्येक बुध्दजीवियों का कर्तब्य बनता है कि इस इस गम्भीर विषय पर मंथन किया जाय क्योकि तीन तलाक जैसी कुरितियां खत्म होने पर महिलाओ पर अत्याचार बंद होने के साथ जनसंख्या बृध्दि पर भी लगाम लगेगा। शादी को पूरी तरह खेल समझने वाले पुरूष वर्ग द्वारा महिलाओ का इस तरह का शोषण एक देश जो कि अपनी संस्कृति एवं सभ्यता के लिए पूरे विश्व में पहचाना जाता है किसी प्रकार और बर्दास्त कर सकता है।
तीन तलाक की कुप्रथा को समाप्त करने लिए जिन जिन व्यक्तियों का योगदान होगा आज का वर्तमान कल का इतिहास उनका नाम स्वर्ण अक्षरो में रचेगा।
लेखिका डा0 जान्हवी श्रीवास्तव
प्रवक्ता मनोविज्ञान विभाग मोम्मद हसन पीजी कालेज जौनपुर।
विषय जब महिला उत्थान का हो ,महिला के आत्मसुरक्षा के भेदभाव का, आत्म सम्मान का हो, महिला शक्तिकरण का हो तो मुद्दा और भी संवेदनशील हो जाता है। ऐसे में सभी महिलाओ के लिए चाहे वह जिस वर्ग से हो। संवैधानिक नियम एवं कानून ही मान्य होना चाहिए। क्योकि कोई भी धर्मग्रन्थ चाहे कुरान, गीता या बाईबिल कुछ भी हो किसी देश के संविधान से ऊपर नही हो सकता। यह तो समाज का हर वर्ग मानता है कि शादी टूटना अच्छा नही है। ऐसे में यदि एक वर्ग अपनी सुविधानुसार अपने धर्म का हवाला देकर कहे कि हमारे धर्म में तीन तलाक है और वह तलाक-ए-बिदअत के तहत तीन तलाक एक साथ दे सकता है तो सरासर अपने औरतो पर अत्याचार करता है। और औरत को सिर्फ भोग का वास्तु ही समझता है। क्योकि तीन तलाक एक साथ देने से न तो पति-पत्नी एक साथ रह सकते है न दुबारा शादी कर सकते है न समझौता की कोई जगह रह जाती है और ही तलाक वापस लिया जा सकता है। समाज के प्रत्येक बुध्दजीवियों का कर्तब्य बनता है कि इस इस गम्भीर विषय पर मंथन किया जाय क्योकि तीन तलाक जैसी कुरितियां खत्म होने पर महिलाओ पर अत्याचार बंद होने के साथ जनसंख्या बृध्दि पर भी लगाम लगेगा। शादी को पूरी तरह खेल समझने वाले पुरूष वर्ग द्वारा महिलाओ का इस तरह का शोषण एक देश जो कि अपनी संस्कृति एवं सभ्यता के लिए पूरे विश्व में पहचाना जाता है किसी प्रकार और बर्दास्त कर सकता है।
तीन तलाक की कुप्रथा को समाप्त करने लिए जिन जिन व्यक्तियों का योगदान होगा आज का वर्तमान कल का इतिहास उनका नाम स्वर्ण अक्षरो में रचेगा।
लेखिका डा0 जान्हवी श्रीवास्तव
प्रवक्ता मनोविज्ञान विभाग मोम्मद हसन पीजी कालेज जौनपुर।


सराहनीय लेख |
जवाब देंहटाएंThanks sir
हटाएंWow nice article..✌
जवाब देंहटाएंThanks
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हटाएंNice thought
जवाब देंहटाएंThanks
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हटाएंNice thought
जवाब देंहटाएंMem shayd apko malom nhi hoga ya to apki study weak hai 3 talak islam se koi wasta nhi hai islam ksa se faila hai waha kjch nhi hai to india me to hindu islam me cknvert hai ye insa mhud ka kanoon hai surah nisha (alquran)
जवाब देंहटाएंMe spast hai ap study kijiye