पति बना एम्बुलेंस फिर भी नहीं बचा सका पत्नी की जान
https://www.shirazehind.com/2017/06/blog-post_366.html
मिर्जापुर। पति बना एम्बुलेंस फिर भी नहीं बचा सका पत्नी की जान। मामला मड़िहान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का है, सरकार के लाख प्रयास और दावों के बाद भी गरीब ग्रामीणों को नहीं मिल रही स्वास्थ्य सुविधाएं। नक्सल प्रभावित मड़िहान तहसील में दिखा स्वास्थ्य महकमे की लापरवाही एक डेढ़ वर्ष के बच्चे की माँ इलाज के अभाव में पति के पीठ पर तोडा दम।
स्थानीय तहसील क्षेत्र के जुड़िया ग्राम के 23 वर्षीय सावित्री की अचानक तबियत खराब हो गयी। परिजन उसे लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मड़िहान गए, जहां डाक्टरों ने उसकी हालत को गंभीर बताते हुए हाँथ खड़ाकर दिए। पत्नी की बिगड़ती हालत देख बेहतर इलाज के लिए पति शिवकुमार ने 108 एम्बुलेंस को सूचना दिया काफी देर तक एम्बुलेंस के न आने से पत्नी की बिगड़ती हालत देख उसका सब्र टूट गया। परिजनों की मदद से पत्नी को पीठ पर बांधकर इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से निकल कर सड़क पर आया। पत्नी को पीठ पर बांधे वह मदद के लिए सड़क पर दौड़ता रहा पर कोई उसकी मदद के लिए आगे नहीं आया बिना इलाज के पत्नी ने उसके पीठ पर ही दम तोड़ दिया। समय से अगर एम्बुलेंस की सेवा मिल जाती तो शायद सावित्री की जान बचायी जा सकती थी।
स्थानीय तहसील क्षेत्र के जुड़िया ग्राम के 23 वर्षीय सावित्री की अचानक तबियत खराब हो गयी। परिजन उसे लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मड़िहान गए, जहां डाक्टरों ने उसकी हालत को गंभीर बताते हुए हाँथ खड़ाकर दिए। पत्नी की बिगड़ती हालत देख बेहतर इलाज के लिए पति शिवकुमार ने 108 एम्बुलेंस को सूचना दिया काफी देर तक एम्बुलेंस के न आने से पत्नी की बिगड़ती हालत देख उसका सब्र टूट गया। परिजनों की मदद से पत्नी को पीठ पर बांधकर इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से निकल कर सड़क पर आया। पत्नी को पीठ पर बांधे वह मदद के लिए सड़क पर दौड़ता रहा पर कोई उसकी मदद के लिए आगे नहीं आया बिना इलाज के पत्नी ने उसके पीठ पर ही दम तोड़ दिया। समय से अगर एम्बुलेंस की सेवा मिल जाती तो शायद सावित्री की जान बचायी जा सकती थी।

